keralaनई दिल्ली/कोल्लम 10 अप्रैल. केरल में कोल्लम के पुत्तिंगल मंदिर में आतिशबाजी के बाद हुए दर्दनाक हादसे में 110 लोगों की मौत हो गई और 400 से अधिक लोग झुलस गये.

इस हादसे में झुलसे लोगों का इलाज कोल्लम के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में चल रहा है, जिनमें 77 की हालत गंभीर बतायी जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राहत कार्य का जायजा लेने के लिए कोल्लम पहुंच गये हैं. इसी बीच संसदीय मामलों के राज्यमंत्री राजीव प्रताप रूडी ने आज कोल्लम में जिला अस्पताल में संवाददाताओं से कहा- एक केंद्रीय मेडिकल टीम मृतकों का डीएनए परीक्षण करके उनकी पहचान करने में राज्य सरकार की मदद करेगी. इसी अस्पताल में 75 से अधिक शव रखे गये हैं.

राज्य मंत्रिमंडल की एक आपात बैठक के बाद मुख्यमंत्री उम्मन चांडी ने यहां कहा कि 60 शवों की पहचान कर ली गई है और शेष 50 शवों की पहचान के लिए कदम उठाये जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस हादसे में मारे गये लोगों के परिजनों को 10 लाख और घायलों को दो लाख की अनुग्रह राशि मंजूर की गई है. इस हादसे की न्यायिक जांच भी कराई जायेगी. मोदी लगातार स्थिति पर नजर रखे हुये हैं और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं. झुलसे लोगों में कुछ की हालत गंभीर बताई गई है. अपुष्ट रिपोर्टों के अनुसार मृतकों की संख्या 110 है.

सोलह मई को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए लागू आचार संहिता के मद्देनजर मंत्रिमंडल चुनाव आयोग से आवश्यक वित्तीय मदद और पीडि़तों को अतिरिक्त चिकित्सा सुविधा मुहैया के लिए छूट देने की अपील करेगा.Þ चांडी में कहा कि राज्य सरकार ने घायलों को तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज और अन्य निजी अस्पतालों में स्थानांतरित करने के लिए दो हेलिकॉप्टरों की सेवाएं मांगी हैं. सरकार निजी अस्पतालों समेत सभी अस्पतालों में इलाज का खर्च उठायेगी.

पुलिस ने यहां बताया कि पारावुर क्षेत्र स्थित मंदिर में उत्सव के दौरान देवस्वोम कार्यालय के समीप रखे पटाखों में आग लगने के बाद बड़ा विस्फोट हुआ. देवस्वोम इमारत के गिरने से कई लोग भी घायल हो गये. अभी तक कुछ शवों की ही पहचान हो सकी है. ज्यादातर घायल कोल्लम, चदायमंगलम और चिरायिलकीझू के रहने वाले है.

मंदिर में चल रहे वार्षिकोत्सव में शामिल होने के लिए यहां पहुंचे आसपास के गांवों के सैंकड़ों लोग इस दुर्घटना में झुलस गए. पुलिस ,दमकल और बचावकर्मियों का दल घटनास्थल पर पहुंच गया है और उन्होंने ध्वस्त इमारत के मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला.

कोल्लम के जिलाधीश ने कहा कि मंदिर में आतिशबाजी के लिए मंदिर प्रशासन को कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं दी गई थी.

केरल में पारंपरिक रूप से इस उत्सव में प्रथाओं की समाप्ति के बाद आतिशबाजी की जाती है. सूत्रों के अनुसार मंदिर के समीप रहने वाले लोग उत्सव में आतिशबाजी के खिलाफ थे. पुलिस ने पटाखों में आग लगने से हुए बड़े धमाके को हादसे की मुख्य वजह बताया है.

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