कोलकाता. देश की टी इंडस्ट्री अपनी पुरानी इमेज से छुटकारा पाकर युवाओं को पसंद आने वाले कॉफी और एरेटेड ड्रिंक्स को टक्कर देने की कोशिश कर रही है। चाय को परंपरागत गर्म और ठंडे रूप में प्रमोट करने के लिए मैक्लॉयड रसेल इंडिया लिमिटेड (एमआरआईएल), एपीजे टी, गुडरिक ग्रुप, अमलगमेटेड प्लांटेशंस प्राइवेट लिमिटेड, वॉरेन टी जैसी इंडस्ट्री की बड़ी कंपनियों और टी ऑक्शनर जे थॉमस एंड कंपनी ने इंडियन टी एसोसिएशन (आईटीए) के बैनर तले हाथ मिलाया है।

आईटीए के वाइस चेयरमैन अजाम मोनेम के अनुसार टी की कोल्ड फॉर्म में बड़ी डिमांड देखी है। उत्तर भारत के युवा सर्दी में भी इसे पसंद करते हैं। इस वजह से हम टी के लिए हॉट और कोल्ड दोनों फॉर्म में मार्केट डिवेलप करने की कोशिश कर रहे हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है कि जब चाय के दाम पिछले वर्ष के मुकाबले ज्यादा हैं। सीटीसी टी की कीमत इस साल 162.30 रुपये प्रति किलोग्राम है, जो पिछले वर्ष 135 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस तरह ऑर्थोडॉक्स टी का प्राइस 224.02 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है, जो पिछले वर्ष 187.29 रुपये प्रति किलोग्राम था। दार्जिलिंग टी की कीमत 1,062.60 रुपये प्रति किलोग्राम है।

मोनेम एमआरआईएल के डायरेक्टर भी हैं। उन्होंने कहा कि टी प्लांटर्स पैकेट में नॉर्मल टी के साथ कोल्ड टी बेचने के लिए पश्चिम भारत की बड़ी कंपनियों से बात कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोल्ड टी को फ्रिज में रखकर बाद में इस्तेमाल किया जा सकता है। देश में जनसंख्या बढऩे के साथ ही चाय की खपत में भी वृद्धि हुई है। देश की जनसंख्या में युवाओं का बड़ा हिस्सा है और यह वर्ग अपने टेस्ट को लेकर भी नए प्रयोग करता रहता है। इंडियन टी एसोसिएशन युवाओं तक पहुंच बढ़ाने और बेवरेज को जितना अधिक संभव हो आकर्षक बनाना चाहती है। देश में सालाना 90 करोड़ टन टी की खपत होती है।

गुडरिक जैसी टी कंपनियां टी को प्रमोट करने के लिए टी लाउंज खोल रही हैं। इसने हाल ही में कर्सियॉन्ग में अपनी एक टी एस्टेट में लाउंज खोला है। टी ड्रिंकिंग को प्रमोट करने के लिए च्टॉय ट्रेनज् के नाम से मशहूर दार्जिलिंग हेरिटेज रेलवेज ने एस्टेट में रुकने का फैसला किया है जिससे विदेशी और घरेलू टूरिस्ट्स दार्जिलिंग की बेहतरीन टी का जायका ले सकेंगे।
शुगर सेक्टर का मुंह मीठा

केंद्र ने शुगर इंडस्ट्री के लिए कई उपायों का ऐलान किया। इनमें किसानों के 20,000 करोड़ रुपये के बकाये को क्लीयर किए जाने को सुनिश्चित करना और शुगर के खराब प्राइस सेंटीमेंट में सुधार करना और इंडस्ट्री में लिक्विडिटी बढ़ाने जैसे उपाय शामिल हैं।सरकार ने शुगर के इंपोर्ट पर ड्यूटी को 25 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया है। साथ ही ब्लेंडिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले एथनॉल पर 12.36 फीसदी एक्साइज ड्यूटी हटा ली गई है। इसके अलावा ड्यूटी फ्री रॉ शुगर की व्यवस्था को भी खत्म कर दिया है। फूड मिनिस्ट्री की प्रेस रिलीज में कहा गया है, च्सरकार ने समय-समय पर इंडस्ट्री को वित्तीय मदद दी है ताकि लिक्विडिटी की सीमाओं से निपटा जा सके। इनमें इंटरेस्ट फ्री वर्किंग कैपिटल लोन और रॉ शुगर एक्सपोर्ट्स के लिए इनसेंटिव्स जैसी चीजें शामिल हैं। हालांकि, खराब प्राइस सेंटीमेंट की वजह से सेक्टर को हो रहे नुकसान, गन्ना किसानों के बकाये जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में हम सेक्टर के लिए कई उपायों का ऐलान कर रहे हैं। 31 मार्च तक गन्ने का एरियर 20,099 करोड़ रुपया था। रिलीज में कहा गया है, च्ओपन जनरल लाइसेंस के तहत शुगर के इंपोर्ट पर ड्यूटी बढ़ाकर 40 फीसदी हो जाएगी, जो फिलहाल 25 फीसदी है। इससे शुगर की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में और गिरावट आने की स्थिति में किसी भी इंपोर्ट से बचने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, शुगर के लिए ड्यूटी फ्री इंपोर्ट ऑथराइजेशन स्कीम को भी वापस ले लिया गया है ताकि डोमेस्टिक मार्केट में लीकेज से निपटा जा सके। इस स्कीम के तहत शुगर के एक्सपोर्टर्स ड्यूटी फ्री शुगर इंपोर्ट कर सकते थे, तय मात्रा में रॉ शुगर की प्रोसेसिंग कर इसे बेच सकते थे।

इसी तरह से शुगर के लिए एडवांस्ड ऑथराइजेशन स्कीम के तहत एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन को पूरा करने की अवधि को घटाकर 6 महीने कर दिया गया है, ताकि डोमेस्टिक मार्केट में इसके किसी भी लीकेज को रोका जा सके। साथ ही, अगले शुगर सीजन में शीरे से बनने वाले एथनॉल को एथनॉल ब्लेंडिंग के लिए सप्लाई किए जाने के लिए एक्साइज ड्यूटी से मुक्त कर दिया गया है और इससे होने वाले फायदे को शुगर मिलों और डिस्टिलरीज को दिया जाएगा।

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