भारत सरकार ने नये कृषि वर्ष 1 जुलाई 17 से 30 जून 18 तक के लिये 27.3 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है. वही यह वर्तमान कृषि वर्ष जुलाई 16 से जून 17 तक अब तक का रिकार्ड स्तर 27.19 करोड़ टन रहने का अंदाजा हो
गया है.

आगामी वर्ष 17-18 के लिये कुछ समय पहले मौसम की यह जानकारी आयी थी कि इस वर्ष अलनीनो का प्रभाव रहेगा और वर्षा कम होगी. लेकिन अब जो अपडेट जानकारी हो रही है उससे अलनीनो का प्रभाव भारत की वर्षा को प्रभावित नहीं कर रहा है और देश में95 प्रतिशत तक वर्षा हो जायेगी. अब इस साल भी मानसून सामान्य रहने की उम्मीद है और खाद्यान्न लाभ की प्राप्ति हो जायेगी.

भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने आगामी खरीफ फसलों के लिये बुआई आदि की पूरी तैयारी कर ली गयी है. खरीफ फसलों के लिये बीजों की पर्याप्त व्यवस्था है. सरकार के स्टाक में 83.46 लाख क्विंटल धान के बीज और 3.75 लाख क्विंटल तुअर दाल के बीज की मात्रा उपलब्ध है. इस बुआई मौसम में 2.90 करोड़ टन रासायनिक खाद की जरूरत होगी. इस बार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का पूरा लाभ भी किसानों तक पहुंचाने के लिये प्रयास किए जायेंगे.

कृषि बाजार में बड़े सुधार की योजना के तहत केंद्र सरकार मौजूदा मंडियों के एकाधिकार को खत्म करने की तैयारी चल रही है. केन्द्र सरकार मॉडल मंडी कानून बनाने जा रही है. इसके तहत प्राइवेट मंडियां खोलने की योजना है. देश के 15 भाजपा शासित राज्यों में इनका लागू हो जाना तय है. अनाज मंडी राज्यों का विषय है. इसलिये गैर-भाजपाई राज्य इसके लिए स्वतंत्र रहेंगे कि वे मंडी सुधार कार्यक्रम में शामिल होना चाहते हैं.

पिछले सालों में दालों के भावों में बहुत तेजी रहने से इस साल दालों का उत्पादन काफी बढ़ गया और दालों का आयात भी बहुत बढ़ गया है. अरहर दाल का उत्पादन 8 गुना बढ़ गया है. इस पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगा दिया है और अब इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत किए जाने की संभावना है.

केंद्र सरकार तुअर दाल खरीद भी रही है, इससे तुअर की उपज में वह मूल्य नहीं मिल रहे हैं जो सरकार ने समर्थन मूल्य के तहत 5050 रुपये प्रति क्विंटल तय किए हैं और बाजारों में इसका भाव काफी नीचे 4000 प्रति क्विंटल आ गया है. देश में पहली बार ही ऐसा हो रहा है कि किसानों को समर्थन मूल्य नहीं मिला.

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