सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिये राज्य सरकार भारी मात्रा में अनाज संग्रहण कर उसे भारी सब्सिडी से राशन के दुकानों के मार्फत गरीबी रेखा के नीचे के लोगों के लिये, स्कूलों में मध्यान्ह भोजन के लिये और अब दीनदयाल रसोई योजना के लिए अनाज का आवंटन करती है.

दूसरी तरफ राज्य के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान यह भी घोषणा करते रहते हैं कि राशन वितरण में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जायेगी.लेकिन वास्तव में हो यह रहा कि सरकार का नागरिक आपूर्ति निगम में ही इतना बड़ा भ्रष्टाचार है कि शासन का जनहित के कामों का खाद्यान्न मंडियों में व्यापारियों को भ्रष्टाचार से मुनाफा लेकर बेचा जा रहा है.

राजधानी भोपाल तक में ऐसे मामले जिला प्रशासन ने पकड़े हैं. पूरे प्रदश में यह रैकेट चल रहा है. 3 अधिकारी बर्खास्त और 6 निलंबन में चल रहे हैं.प्याज खरीदी के समय भी आपूर्ति निगम का एक अधिकारी प्याज का पूरा रेल रेक व्यापारी को तो बेच गया और सरकारी रिकार्ड में उसे खराब दर्शा रहा था.

अरबों रुपये का यह भ्रष्टाचार का खेल पूरे प्रदेश में चल रहा है. सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों पर नेताओं का कब्जा है और ये लोग दुकानदारों के जरिये सरकारी खाद्यान्न को काला बाजार या भ्रष्टाचार बाजार में बेच रहे हैं. सरकारी सील वाली बोरी को बदलकर उसे 16 सौ रुपये बेचा गया है.

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