एक लंबे अर्से से चली आ रही खाद्यान्नों के भावों में तेजी अब आने वाले बड़े त्योहारों नवरात्र, दशहरा और दिवाली के कारण भावों में अत्याधिक उछाल आया है. देश में प्याज व दालों के उत्पादन में काफी कमी होने से भावों में लगातार तेजी होती ही जा रही है. दालें 200 रुपये प्रतिकिलो की तरफ तेजी से बढ़ रही है. प्याज 100 रुपये प्रति किलो की तरफ जा रही है. सरकारी घोषणाएं कि आयात शुरू हो गया है काफी आयात और आ रहा है. बाजारों पर इनका प्रभाव कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा है. ये केवल सरकारी दिखावा ही लग
रहा है.

हाल में कहा गया कि अफगानिस्तान से प्याज आ गयी है और शीघ्र ही भाव गिरेंगे. दिल्ली में भाव चढ़ते जा रहे है. सरकारी तौर पर भी प्याज के डिटेल काउंटर कुछ ही जगह पर टोकन दिखावा ही साबित हुए. पूरी दिल्ली को ही प्याज नहीं मिली. प्याज या दालों का इतना आयात हो कि उसे पूरे देश के बाजारों में भेजा जा सके. तब जाकर कुछ असर होगा. यह भी कहा गया कि म्यानमार से अरहर की दाल की खेप आ गयी. बिहार में चुनाव हो रहे है तो वहां राजनैतिक लाभ के लिये भेज दी. उसमें वह भी इतनी नहीं है कि पूरा बिहार उससे कवर हो जाए. जो कुछ भी दालों या प्याज का आयात हो रहा है. उससे पूरे राष्टï्र की जरूरत पूरी नहीं वाली है. होने यही जा रहा है कि कुछ इधर भेज दिया कुछ उधर भेज दिया और पूरा कहीं नहीं पड़ा- अभाव सभी जगह बना रहा और भाव चढ़तेे चले गये.

खाद्य तेल में देश में 60 प्रतिशत की कमी कई दशकों से बनी हुयी है. दालों में 40 प्रतिशत की कमी चली आ रही है. सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिये मलेशिया और इंडोनेशिया से पाम आयल का आयात करती है. बाकि खाद्य तेल मूंगफली, सरसों, सोया खाद्य तेलों का आयात निजी क्षेत्र करता है. सरकार ने खाद्य तेल आयात पर आयात शुल्क बढ़ा दिया जिससे देश में खाद्य तेलों के भावों में 12 प्रतिशत की वृद्धि हो गयी. सरकार के खजाने में तो आयात शुल्क बढ़ाने से इजाफा हो गया. 12 प्रतिशत भाव बढऩे से आम उपभोक्ता तो और लुट गया. कई जगह सरकार खुद ही महंगाई बढ़ा रही है.

यही हाल शक्कर में हो रहा है. अभी कुछ दिनों पहले तक अन्तरराष्ट्रीय बाजार में शक्कर के भाव गिरने से निर्यात घाटे का रहा इसलिये निर्यात नहीं हो रहा था. देश में स्टाक बढऩे से शक्कर लागत मूल्य 33 रुपये के स्थान पर मिल से 22 रुपये किलो बेची जा रही थी. सरकार ने शक्कर पर निर्यात सब्सिडी देकर 40 लाख टन शक्कर का निर्यात करा रही है. अमेरिका में शक्कर के भाव 21 प्रतिशत बढ़ गये हैं. इसका नतीजा यह हो रहा है कि देश में शक्कर के भाव तेजी से ऊपर जा रहे हैं.
त्योहारों का सीजन आने से शक्कर की मांग बढ़ गयी है. इस समय देश में शक्कर के भाव 24 प्रतिशत बढ़ गये हैं. शक्कर मिलों ने शक्कर के भाव 2307 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2856 रुपये प्रति क्विंटल कर दिये. त्योहार के सीजन में शक्कर का निर्यात बढ़ाना निश्चित रूप से देशवासियों के आर्थिक हित के विपरीत कदम है.

सरकार भावों पर नियंत्रण करने के लिये जो कुछ भी कदम उठा रही है वह बहुत कम है. आयात का दिखावा हो रहा है वास्तव में देश में भावों में निरन्तर वृद्धि जारी है.