मौसम की मार ने इस साल अनाजों की उपज और उनकी क्वालिटी में भारी कमी कर दी और अब यह खबरें आ रही हैं कि अगले साल से सामान्य से कम वर्षा होगी तथा अलनीनो का प्रभाव भी रहेगा. बड़े उद्योग की आटा मिलों ने आस्ट्रेलिया से गेहूं आयात कर लिया और सरकार भी आस्ट्रेलिया व अमेरिका से गेहूं आयात का विचार कर
रही है.

इससे खाद्य वस्तुओं के बाजारों में भावों में एकाएक तेजी आनी शुरू हो गई है और आने वाले दिनों के बारे में यह आशंका हो रही है खाद्य वस्तुओं के भावों में काफी तेजी आ जायेगी. इसके विपरीत किन्हीं अन्य परिस्थितियों में इस साल आलू और प्याज का उत्पादन बहुत ज्यादा हो गया. केन्द्र सरकार प्याज का न्यूनतम आयात मूल्य कम कर रही है और पंजाब सरकार ने लोगों से अपील की है कि राज्य और देश के लोग इस साल आलू ज्यादा खाएं जिससे आलू की खपत बढ़ जाए. पश्चिम बंगाल में यह हालत हो गई है कि आलू के कोल्ड स्टोरेज भर गये हैं और आलू का भारी स्टाक बाहर पड़ा है.
लेकिन गेहूं को लेकर देश में अच्छी-खासी चिन्ता उत्तर और मध्य भारत तक हो रही है जो भी गेहूं खाने के इलाके हैं वहां गेहूं के भावों का लोगों को अधिक मूल्य देना होगा. भारत के दक्षिणी व पूर्वी भागों में चावल मुख्य खाद्य पदार्थ है वहां स्थिति ठीक ही रहेगी. देश के गेहूं बफर स्टाक में इतना अनाज है कि देश में गेहूं का संकट नहीं रहेगा. मामूली सी कमी आयेगी तो बफर स्टाक से आसानी से पूरी हो जायेगी.

वायदा बाजार (फारवर्ड ट्रेडिंग) के कारोबार में कृषि उत्पादों की कीमतों में तेजी दर्ज की गयी है. चना, चीनी व सोयाबीन में 2 से 3 प्रतिशत की वृद्धि आ चुकी है.
भारतीय मौसम विभाग ने कहा कि वर्षा की पूरी लम्बी अवधि में 5 प्रतिशत की कमी रह सकती है, लेकिन खेती को इससे आश्वस्त नहीं किया जा सकता कि पूरी अवधि में वर्षा 5 प्रतिशत कम रहेगी. कृषि में यह ज्यादा जरूरी है कि जिस समय वर्षा हो वह हो और बीच-बीच में जब रुकना हो तो रुके. कुछ जिलों मेें कितनी वर्षा हो जाएगी, यह खेती के मतलब की बात नहीं है. वह मौसम विभाग की पूर्ति हो सकती है. लेकिन यदि अल नीनो वास्तव में प्रभावशील हो गया तो वर्षा में भारी कमी आ सकती है. पिछले दो सालों से मानसून की वर्षा मौसम में तो काफी पूरी रही लेकिन खेती के कार्यक्रम में काफी अस्त-व्यस्त रही. इससे खेती को नुकसान पहुंचा. कमजोर मानसून रहा तो भारत की सकल घरेलू उत्पाद दर 50 अंक आधार 7.9 प्रतिशत तक कम हो सकती है. यह भी माना जा रहा है कि इस समय खाद्य पदार्थों की जो मूल्यवृद्धि हो रही है वह तात्कालिक है. आगे चलकर भाव स्थिर रहेंगे. अगली बरसात के बारे में आशंकाएं है. अन्यथा देश खाद्यान्न का बफर स्टाक अर्थव्यवस्था को स्थिर ही रखेगा.