बेमौसम बरसात व ओलों ने न सिर्फ अनाज बिगाड़ा है बल्कि उसका खाना भी खराब कर दिया. अनाज की क्वालिटी इतनी गिर गयी कि आटा मिलों के ब्लक थोक खरीददारों ने विदेशों से अनाज आयात कर लिया.

खाते तो हम गेहूं-चावल है लेकिन यदि उन्हें खाने के लिये सब्जियों, दालों व नानवेज में मसाले ही न हो तो और उन्हें उबली या भुन्जी के रूप में खाने के साथ दे दिया जाए तो कोई खायेगा कैसे. जब अनाज की फसलें बिडग़ी है तो रबी की और सभी फसलें भी बिगड़ गयी. इनमें मसालों, धनिया, जीरा, हल्दी, अजवाइन आदि की फसलें बिगड़ गयी. ये मसाले सामान्य तौर पर ही अनाज सेे महंगे होते हैं. लेकिन कम मात्रा में लगते है इसलिए अनाज के मुकाबले कम ही लगते है. लेकिन बिना इनके खाना खाया ही नहीं जा सकता. इनकी फसलें और बीज काफी बारिक व नाजुक होते है और खराब मौसम का असर इन पर बहुत पड़ता है. ये फसलों और उद्यानिकी के बीच का उत्पाद होते है जो न तो अनाज है और न ही फल है- ये अपने आप में एक अलग पहचान है और भोजन में अनिवार्य है. बिना इनके भोजन की कल्पना ही नहीं की जाती है. जैसे मुहावरों में ‘कोई बात गले से नीचे नहीं उतरती हैÓ वैसे ही इनकी वास्तविकता में इनके बिना कोई खाना भी गले से नीचे नहीं उतरेगा. शरीर को वाणी और स्वाद देने वाला अंग जीभ उसे स्वीकार तक नहीं करेगा.

बेगम अख्तर ने तो गाया है कि ‘हम तो समझे थे बरसात में बरसेगी शराब- आई बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दियाÓ. इस बार बरसात ऐसी आयी कि ‘बम्परÓ फसलों को ही तोड़ दिया. जब किसी चीज को तुच्छ बताना होता है तो मुहावरा है ‘ऊंट के मुंह में जीराÓ लेकिन इस बार तो हमारे मुंह में ही जीरा आना मुश्किल लग रहा है. खाने को स्वाद देने में जीरे की खुशबू की अपनी शानदार भूमिका होती है. जीरा आयुर्वेद की एक औषधि है. बीमारी में भूख कम हो जाती है तो वैद्य कहते हैं कच्चा जीरा खाओ और सूंघो- भूख खुल जायेगी.
इस बरसात में सभी मसालों की फसलों पर बहुत बुरा असर पड़ा है. इनमें सबसे ज्यादा जीरा महंगा हुआ है. जीरा की कीमतें वायदा बाजार में 25 प्रतिशत का भारी उछाल अप्रैल महीने में हो गया और आने वाले वक्त में इसके दामों में भारी तेजी का अंदाजा हो रहा है. इस समय हाजिर बाजार में जीरा का दाम 17.72 प्रतिशत बढ़कर 17,929 रुपये प्रति क्विंटल हो गया.

देश में जीरा की फसल लगभग 50 प्रतिशत खराब हो गयी. वर्षा-ओलों व आंधी की मार से जीरा कच्ची फसल में ही झड़ गया. जीरा उत्पादन का प्रमुख राज्य राजस्थान है जहां ढाई लाख हेक्टेयर में जीरा फसल खराब हो गयी. गुजरात में जीरा का उत्पादन 53 प्रतिशत गिर गया है. जीरा में भाव बढऩे की हद हो गयी है. पिछले एक साल में जीरा के भाव 70 प्रतिशत बढ़ चुके हैं और अब 100 प्रतिशत से भी आगे जाता दिखाई पड़ रहा है.

अप्रैल में हल्दी में 10 प्रतिशत की वृद्धि हो गयी है और अब तक 21 प्रतिशत भाव बढ़ चुके हैं. इसकी फसल खराब होने से इसके भाव 8,400 प्रति क्विंटल के पार चले गये हैं और बढ़त जारी है. हल्दी का प्रमुख राज्य आंध्रप्रदेश है जहां इसका रकबा एक लाख हेक्टेयर से घटकर महज 13 हजार हेक्टेयर बचा है. धनिया की फसल बुरी तरह खराब हो गयी है. इसके दामों में 16 प्रतिशत की बढ़ोत्री होकर यह 10,000 रुपये प्रति क्विंटल के पार हो गयी.

इन दिनों मसाला व्यापारियों में वायदा व हाजिर बाजार में जमकर मुनाफा वसूली हो रही है और यह मुनाफा वसूली बढ़ती ही जाने की आशंका है.
मानें तो तसल्ली के लिये यही काफी है कि लाल मिर्च के भाव गिरे हैं. इसे खा लें- तीखापन तो मिल ही जायेगा. मसालों के भावों पर आंसू भी आ जायेंगे.