नयी दिल्ली,  जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कहा है कि जीवनदायनी गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रस्तावित गंगा एक्ट पूरी दुनिया में नदी संरक्षण का एक आदर्श कानून साबित होगा।

सुश्री भारती ने आज यहां अपने मंत्रालय की तीन वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी देने के अवसर पर संवाददाताओं से कहा कि गंगा में प्रदूषण कोैन फैलाता है, इसकी जिम्मेदारी जब तक तय नहीं होगी तब तक प्रदूषण खत्म करने के लाख उपाय कर लें उसका कोई असर नहीं होने वाला है,इसलिए उनका मंत्रालय गंगा एक्ट पर तेजी से काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि गंगा में औसतन रोजाना 20 लाख लोग नहाते हैं। सालाना स्तर पर यह औसत 60 करोड़ तक पहुंच जाता है। कई सारी ऐसी औद्योगिक इकाइयां हैं जो पंजीकृत नहीं हैं, वे भी औद्योगिक कचरा गंगा में बहाती हैं। ऐसे में यह तय करना मुश्किल है कि आखिर गंगा को गंदा कौन करता है। यह जवाबदेही तय करने और उन्हें दंडित करने के लिए गंगा एक्ट लाया जा रहा है।

उन्हाेंने कहा कि कानून बन जाने से प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकेगी। सुश्री भारती ने कहा कि कानून बनाने के लिए महामना पंडित मदनमोहन मालवीय के पोते पूर्व जस्टिस गिरधर मालवीय की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है।

समिति सभी पक्षाें की राय के साथ बारीकी से हर मुद्दे की जांच कर रही है। पूरी दुनिया के नदी संरक्षण कानूनों का विशद अध्ययन किया जा रहा है। कानून बनाते समय हर संवेदनशील और मानवीय पहलु पर भी गौर किया जा रहा है। उन्हाेंने बताया कि कानून बनाने का काम अंतिम चरण में है। इसे बस अब कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जाना बाकी है। यह काम भी जल्दी ही पूरा हो जाएगा।

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