2014 में गंगा आरती के दौरान राजनाथ सिंह के साथ पीएम मोदी की तस्वीर

नई दिल्ली,

केंद्र की सत्ता पर काबिज होने के बाद मोदी सरकार ने गंगा की सफाई को अपने मुख्य अजेंडे में शामिल किया था. मई 2014 से अब तक करीब साढ़े तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन गंगा की सफाई को लेकर काम अब तक जमीन पर नहीं दिख रहा है.

अब सरकारी खर्चों का लेखा-जोखा रखने वाले कैग ने भी गंगा सफाई में सुस्ती पर सरकार को फटकार लगाई है. कैग के मुताबिक बीते 2 सालों में गंगा की सफाई के लिए आवंटित की गई कुल राशि की एक चौथाई रकम भी खर्च नहीं हुई है.

कैग ने इसके लिए सरकार की वित्तीय योजना और प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है. कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नैशल मिशन फॉर क्लीन गंगा प्रोग्राम के तहत अप्रैल, 2015 से लेकर मार्च, 2017 तक 6,700 करोड़ रुकी राशि आवंटित की थी.

बीते सप्ताह संसद में पेश की गई कैग की 160 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है, परफॉर्मेंस ऑडिट से यह खुलासा होता है कि फाइनैंशल मैनेजमेंट, प्लानिंग, इम्प्लिमेंटेशन और मॉनिटरिंग में खामी के चलते पर्याप्त राशि खर्च नहीं हुई. इस बारे में क्लीन गंगा मिशन पर काम करने वाले जल संसाधन मंत्रालय ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. फिलहाल यह मंत्रालय नितिन गडकरी के पास है, इससे पहले पीएम मोदी ने यह जिम्मेदारी उमा भारती को सौंपी थी.

 

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