mp2बैतूल,  मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान ने घोड़ाडोंगरी उपचुनाव के पहले गढ़ा बांध डूब प्रभावितों के लिए करोड़ों रूपए की राशि की घोषणा कर दी हो, लेकिन अब भी कई किसान ऐसे है जो अपनी उपजाऊ जमीन को छोडऩा नहीं चाहते।

तमाम सर्वे के बावजूद शुक्रवार को एक बार फिर गढ़ा बांध का विरोध शुरू हो गया। गढ़ा सहित आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांवों के किसानों ने आज मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर माचना नदी पर घोषित गढ़ा बांध निरस्त कर बैराज बनाने की मांग की है। क्षेत्र के आधा सैकड़ा से अधिक किसानों ने बताया कि माचना नदी पर गढ़ा बांध घोषित किया गया है। जो जमीन किसानों की डूब रही है वह अत्यधिक उपजाऊ और स्टाप डेमों से पूर्ण सिंचित है।
अत्यंत उपजाऊ भूमि की अपूर्णीय क्षति है।

किसानों का कहना है प्रभावित क्षेत्र के किसानों से बिना विचार विमर्श किए उक्त डेम की घोषणा कर दी। इस वजह किसान आक्रोशित है। यदि मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया तो किसान जनआंदोलन और भूख हड़तालों के लिए भी बाध्य हो सकते है। ज्ञापन में बताया कि क्षेत्र के किसान चाहते है कि यहां बड़ा बांध न बनाकर माचना नदी पर दो या तीन बैराज बनाए जाए। जिससे कृषक बेघर नहीं होंगे और उपजाऊ भूमि भी नहीं सूखेगी।

सभी ने बताया कि ढूंढा बोरगांव में एक डेम पहले से ही है। इस स्थिति में वह भी डूब जाएगा और सैकड़ों कृषकों को परेशानी होगी। किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि माचना नदी पर घोषित गढ़ा बांध निरस्त किया जाए, नदी पर बैराज बनाया जाए।