07handloomचेन्नई, 7 अगस्त. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के हथकरघा उद्योग की अहमियत को रेखांकित करते हुए आज कहा कि आजादी के संघर्ष में गुलामी से मुक्ति का प्रतीक रहा यह उद्योग आज गरीबी से मुक्ति का बड़ा हथियार बन सकता है.

वह आज चेन्नई में पहले हथकरघा राष्ट्रीय दिवस के मौके पर बोल रहे थे. उन्होंने इस अवसर देश के हथकरघा उद्योग की सदियों से चली आ रही खूबियां गिनाते हुए कहा कि भारत दुनिया के चंद बेहतरीन हथकरघा उत्पादों का केन्द्र है. इन उत्पादों में ज्यादातर प्राकृतिक रेशों का इस्तेमाल होता है जो स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के नजरिए से काफी लाभकारी हैं इसलिए देश विदेश में आज इनकी खासी मांग है. भारत के हथकरघा उद्योग को इस अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब देश के बुनकरों और कारीगरों से बनाई हुई चीजें, अफ्रीका,यूरोप ,अरब देशों और चीन तक बिकती थीं . आज बढ़ती प्रतिस्पर्धा के इस दौर में इन उत्पादों को बेचने के लिए वैश्विक स्तर पर ब्रांडिंग और मार्केटिंग करनी होगी.

उन्होंने बुनकरों के लिए सरकार की ओर से मदद की कयी योजनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि बुनकरों को वर्कशेड बनाने और हथकरघा से जुडे सामान खरीदने के लिए दी जाने वाली आर्थिक मदद अब बिचौलियों और दलालों के जरिए नहीं बल्कि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचेगी. एक हथकरघा समूह के विकास के लिए पहले जहां 60 लाख रूपए की मदद दी जाती थी उसे अब बढाकर 2 करोड़ रुपए कर दिया गया है. बुनकरों के परिवारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए धन जन योजना के तहत व्यवस्था की गयी है. उन्होंने हथकरघा उद्योग को बढावा देने के लिए लोगों से अधिक से अधिक हथकरघा उत्पाद अपनाने की अपील भी की.

हथकरघा राष्ट्रीय दिवस जैसा बड़ा आयोजन पहली बार दिल्ली से बाहर चेन्नई में आयोजित किया गया . प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरूआत तमिल में वनक्कम बोलकर जैसे ही की वैसे ही पूरा सभागार तालियों की गडगडाहट से गूंज उठा. उन्होंने आग भी तमिल में बोलते हुए कहा कि वह तमिलनाडु आकर बहुत खुश हैं.

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