नयी दिल्ली,  राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने आज कहा कि आज जब वैश्विक अर्थव्यस्था कमजोर और औद्योगिक विकास रोजगारविहीन बना हुआ है, विकेन्द्रीकृत, वितरणशील और वैविध्यपूर्ण नवप्रवर्तन पर आधारित उद्यमों का राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मॉडल समस्याओं के समाधान का सर्वश्रेष्ठ उपाय है।

श्री मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन में एक सप्ताह तक चलने वाले नवप्रवर्तन उत्सव का उद्घाटन करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हमेशा सामुदायिक ज्ञान और संस्थाओं के साथ आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ मेल चाहते थे। उनका यह संदेश आज के संदर्भ में बहुत प्रासंगिक है।

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर निचले स्तर पर नवप्रवर्तन एवं उत्कृष्ट पारम्परिक ज्ञान के लिए नौवें राष्ट्रीय दिवार्षिक पुरस्कार वितरित किये, इन रेजिडेंसी कार्यक्रम के तहत राष्ट्रपति भवन में रुके नवाचार विद्वानों, कलाकारों और लेखकों से मुलाकात की और देश भर के निचले स्तर पर नवाचार के नवप्रवर्तकों की नवप्रवर्तन प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी जनता के लिए 10 मार्च तक सुबह दस से शाम पांच बजे तक खुली रहेगी।

श्री मुखर्जी ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी भी कमजोर है और औद्योगिक विकास होने के बावजूद लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है। ऐसे में विकेन्द्रीकृत नवप्रवर्तन आधारित उद्यम का गांधी जी का मॉडल समस्याओं के समाधान का सर्वश्रेष्ठ उपाय है।

उन्होंने कहा कि समावेशी विकास के परिवेश में पारिस्थितिकी प्रणाली को और समृद्ध करने के लिए निचले स्तर पर नवप्रवर्तन की सभी सार्वजनिक और निजी प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है और भारत के लिए विशेष रूप से उपयुक्त समावेशी नवप्रवर्तित पारिस्थितिकी प्रणाली के उदय के लिए पहले से ज्यादा कई और कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि देश में निचले स्तर पर समावेशी नवप्रवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए इस बार नवप्रवर्तन उत्सव का एक सप्ताह तक आयोजन किया गया है।

उन्होंने कहा कि बच्चों में भी वैज्ञानिक अभिरुचि और अनुसंधान की भावना विकसित करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए बच्चों के कौतूहल और उनकी रचनात्मकता को बढ़ावा देना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत स्टार्ट अप इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत जैसी पहलों के जरिये विकास का लाभ देश के हर कोने तक पहुंचाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि नवप्रवर्तकों के विचारों से वास्तविक बदलाव तभी संभव है, जब विभिन्न भूमिकाओं में शामिल लोग और संस्थाएं देश में समवेदनशीलता और सृजनशीलता के लिए मिलकर काम करें।

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