trainनयी दिल्ली,  ट्रेनों की समयबद्धता के मामले में पिछले छह महीनों में काफी सुधार आया है और गाड़ियों की लेटलतीफी तीस प्रतिशत कम हुई है लेकिन गाड़ियों का औसत विलंब 35 मिनट से ऊपर ही बना हुआ है।

रेल सेवाओं से जुड़ी जानकारियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने वाले पोर्टल रेलयात्री डॉट इन के एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आयी है।

तकरीबन ढाई हजार महत्वपूर्ण स्टेशनों पर छह माह तक चले इस व्यापक सर्वेक्षण में पाया गया कि ट्रेनों के राष्ट्रीय विलंब औसत में वर्ष 2016 के आरंभ से अब तक छह माह में करीब तीस प्रतिशत की गिरावट आयी है।

हालांकि जून अंत तक के आँकड़ों के अनुसार औसत विलंब अवधि 35.03 मिनट बनी हुई है।

रेलयात्री डॉट इन के अनुसार हर माह दस लाख से अधिक ट्रेनों के परिचालन के आँकड़े जुटाये गये।

यात्रियों से उनकी यात्रा के बारे में अनुभव जाने गये।

यह भी देखा गया कि अौसतन हर यात्री को स्टेशन पर गाड़ियों के आगमन के निर्धारित समय से कितना अधिक इंतजार करना पड़ा।

ट्रेन विलंब सूचकांक में गाड़ी के अंतिम गंतव्य स्टेशन पर पहुँचने के समय के आधार पर ही आँका जाता है।

अर्थात् यदि गाड़ी बीच में कितना ही विलंबित हो, पर अंतिम स्टेशन पर समय पर पहुँच जाये तो उसे विलंबित नहीं माना जाता है।

इससे पता चलता है कि ट्रेनों की समय सारणी में अंतिम स्टेशन के पहले लंबा बफर टाइम क्यों रखा जाता है।

पर रेल यात्री डॉट इन ने अपने अध्ययन में बीच के स्टेशनों पर गाड़ी की परिचालन स्थिति को भी गिना है।

जून 2016 के अनुसार गाड़ियाें के सबसे कम विलंब वाले राज्य गुजरात (14 मिनट), तमिलनाडु (19 मिनट), पश्चिम बंगाल (23 मिनट), झारखंड (24 मिनट) और कर्नाटक (26 मिनट) हैं।

सबसे ज्यादा विलंब वाले राज्य बिहार (61 मिनट), उत्तर प्रदेश (55 मिनट), पंजाब एवं गोवा (50 मिनट) तथा तेलंगाना (38मिनट) हैं।

जिन राज्यों में छह माह में गाड़ियों के विलंब को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है उनमें कर्नाटक (56 प्रतिशत), हरियाणा (52 प्रतिशत), दिल्ली (45 प्रतिशत), पंजाब (38 प्रतिशत) पंजाब (38 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (36 प्रतिशत) हैं।

जिन राज्यों में गाड़ियों का विलंब और बढ़ा है उनमें तमिलनाडु (12 फीसदी), छत्तीसगढ़ (सात फीसदी), ओडिशा (पांच फीसदी) और केरल (एक फीसदी) शामिल हैं।

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