उन्नाव कांड

इलाहाबाद,

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उन्नाव के कथित बलात्कार मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को अविलंब गिरफ्तार करने का आज आदेश देते हुए दो मई तक स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश डी बी भोंसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। युगल पीठ ने कल सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

न्यायाधीश द्वय ने कहा कि आरोपी की हिरासत पर्याप्त नहीं है, उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। न्यायालय ने राज्य सरकार से दो मई तक मामले की प्रगति रिपोर्ट भी पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा खंडपीठ ने 20 जून 2017 में दर्ज प्राथमिकी के नामजद तीनों आरोपियों की जमानत रद्द कर उन्हें जेल भी भेजने को कहा है। न्यायालय ने कहा कि केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पूछताछ के लिए बुलाया है, किंतु गिरफ्तारी नहीं की है। उसे अविलंब गिरफ्तार किया जाये।

महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने पीठ काे बताया कि सीबीआई ने सुबह भाजपा विधायक को हिरासत में ले लिया है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “सीबीआई अथवा अन्य जांच एजेंसियों को विधायक और अन्य आरोपियों को बगैर देरी किये गिरफ्तार करना चाहिये।”

न्यायालय ने कल मामले की सुनवाई करते हुए पूछा था कि उत्तर प्रदेश सरकार भाजपा विधायक को कब गिरफ्तार करेगी। पीड़िता के अनुसार बांगरमऊ के विधायक ने पिछले साल 17 जून को उसके साथ बलात्कार किया था। उसके पिता को विधायक के भाई और समर्थकों ने मारा पीटा भी था, जिस कारण उनकी पिछले सोमवार को पुलिस हिरासत में मृत्यु हो गयी थी।

न्यायालय में मौजूद महाधिवक्ता ने पीठ को बताया कि 17 अगस्त 2017 को मुख्यमंत्री कार्यालय में एक आवेदन भेजा गया था। आवेदन में विधायक के विरुद्ध बलात्कार के आरोप लगाये गए थे। आवदेन को उचित कार्रवाई के लिए उन्नाव में संबंधित अधिकािरयों को भेज दिया गया था। महाधिवक्ता की इस दलील पर पीठ ने सवाल किया कि इस मामले में और क्या किया गया, क्या अब तक कोई गिरफ्तारी की गई है।

खंडपीठ और महाधिवक्ता के बीच इस मामले पर काफी लंबी बहस हुई। कई बार खंडपीठ का रुख काफी तल्खी वाला रहा। न्यायालय के यह पूछने पर कि सरकार विधायक को गिरफ्तार करना चाहती है या नहीं, महाधिवक्ता ने कहा, “मैं कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूं और ऐसा बयान नहीं दे सकता हूं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। मामले को जैसा बताया जा रहा है, वैसा है नहीं। मीडिया इस मामले को अलग रंग दे रही है।”

इस पर खंडपीठ ने कहा कि कोई रंग नहीं दे रहा है और ऐसी घटनाएं प्रदेश में रोज हो रही है। पीड़िता का अपहरण हुआ, उससे बलात्कार किया गया। आरोपी को गिरफ्तार करने की बजाय पीड़िता के पति को ही जेल भेज दिया गया। आर्म्स कानून के आरोपी को जेल भेजा जा रहा है और बलात्कार के आरोपी की गिरफ्तारी के लिए जांच जरूरी है।

महाधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि विधायक के भाई समेत तीन लोगों को अब तक गिरफ्तार किया गया है। खंडपीठ ने इस पर सवाल किया कि क्या विधायक को भी गिरफ्तार करने की कोई योजना है। न्यायालय के इस कथन पर महाधिवक्ता ने कहा कि वह इस संबंध में कोई बयान देने की स्थिति में नहीं है और पुलिस शिकायतकर्ता और गवाहों का बयान दर्ज करने के बाद कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी। सेंगर भी बलात्कार के मामले में आरोपी हैं।

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