देश में बब्बर शेर केवल गुजरात के गिर क्षेत्र में ही पाये जाते है इसलिए यहां इनका नाम ‘गिर लाइन’ पड़ गया है. मध्यप्रदेश ‘सोया’ राज्य की तरह देश का ‘टाइगर राज्य’ भी माना गया है. यहां अनेक प्रतिष्ठित बाघ अभ्यारण कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना आदि है.

इसके साथ ही राज्य में मुरैना में कूनोपालपुर में एक बाघ अभ्यारण बनाया और चाहा कि यहां भी गिर शेर आ जाए. गुजरात तैयार भी हो गया लेकिन बाद में वह संगदिली पर आ गया और अलग दिखने के लिए बब्बर शेरों को गिर तक ही सीमित रखना चाहा और मध्यप्रदेश को नहीं दिये. हाल ही में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उत्तेजित होकर कह दिया कि कूनो में दूसरे बाघ बसाए जाएंगे.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2013 में ही यह निर्देश दिया था कि गिर के जंगलों में क्षमता से अधिक 650 से ज्यादा सिंह हो गये हैं और इनमें से कम से कम आधा दर्जन गिर शेर मध्यप्रदेश को दिये जायें. लेकिन गुजरात सरकार वादा करके मुकर गयी. अब फिर सुप्रीम कोर्ट में यह निर्देश न मानने पर अवमानना याचिका लगने पर गुजरात इस बात पर सहमत हो गया है कि वह 3-4 महीनों में मध्यप्रदेश को गिर शेर दे देगा.

बब्बर शेर तो दुनिया में सबसे ज्यादा अफ्रीका में हैं लेकिन सफेद शेर तो सारी दुनिया में केवल मध्यप्रदेश में था और केवल एक ही ‘मोहन’ नाम का बचा था. उस एक शेर से मध्यप्रदेश ने उसकी सफेद जाति को दुनिया में विलुप्त होने से न सिर्फ बचा लिया बल्कि प्रजनन से सारी दुनिया में फैला दिया. आज कई देशों में सफेद शेर है. यह मध्यप्रदेश की दरियादिली है.

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