नामांकन के साथ ही गुजरात विधानसभा चुनावों में राजनीति जोड़-तोड़ और प्रचार अभियानों ने जोर पकड़ लिया है.

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य की 182 सदस्यीय विधानसभा के लिये असली चुनाव संघर्ष सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस के बीच ही है. पिछले 5 टर्म- 1995- 1998- 2000- 2007 और 2012 से भारतीय जनता पार्टी लगातार बहुमत व सत्ता में है और अब 6वीं बार भी सत्ता के लिये मैदान में है.

सन् 2012 की विधानसभा में श्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री थे और लोकसभा सदस्यता व प्रधानमंत्री पद पाने पर वे यहां से त्याग पत्र देकर केंद्र की राजनीति में गये थे. यहां के 5 टर्म में भाजपा तीन अंकों की सदस्या वाली पार्टी बनी हुई है और कांग्रेस दो अंकों की सदस्यता वाली पार्टी है.

भाजपा की सदस्यता में कम अंतर से उतार-चढ़ाव होता रहा. लेकिन कांग्रेस की सदस्यता बढ़ती रही. भाजपा 1995 में 121- 1998 में 117- 2002 में 127- 2007- 117 और 2012- 115 सदस्य रही. कांग्रेस क्रम में 45-53- 51- 59 और 61 सदस्य रही.

इस चुनाव में शक्ति परीक्षण कशमकश है और सबसे ज्यादा दबाव कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री राहुल गांधी पर है. उन्हें अपना नेतृत्व का असर भी साबित करना है.

इन दिनों पूरे देश के चुनावों में मुख्य मुद्दा ”आरक्षण” और रटा-पिटा नारा ”विकास” बना हुआ है. यही स्थिति गुजरात में भी चल ही है.

राजस्थान से प्रारंभ हुए और हरियाणा तक पहुंच गये ”जाट आरक्षण” से प्रेरित होकर गुजरात में कुछ वर्षों पूर्व एक नये नाम नेता के रूप में हार्दिक पटेल ने पाटीदारों (पटेल) के आरक्षण के लिये गुजरात में काफी बड़े पैमाने पर आन्दोलन छेड़ा. दोनों ही जातियां ‘जाट’ और पाटीदार सम्पन्न किसान वर्ग हैं और ये पिछड़ा वर्ग में नहीं आते.

जाटों के दबाव में दो राज्य सरकारों ने उन्हें आरक्षण देना भी चाहा तो सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पिछड़ा वर्ग नहीं माना आगे चलकर यही कानूनी स्थिति पाटीदारों के बारे में भी होने की संभावना है.

इस चुनाव में हार्दिक पटेल ने पाटीदार आरक्षण पर दोनों प्रतिद्वंदी पार्टियों सत्तारुढ़ और कांग्रेस से उनके आरक्षण के समर्थन चाहा. लेकिन स्पष्टï रूप से इस मसले पर दोनों में से कोई भी वचन देने को तैयार इसलिये नहीं हैं क्योंकि वे जानते हैं कि

यह कानूनी रूप से पेचीदा मामला है और केवल राजनैतिक दृष्टिï से हल किया जाना संभव नहीं है. फिर भी कांग्रेस ने यह जरूर कहा है कि वे इस मसले को आगे बढ़ायेंगे. हार्दिक पटेल भी जानते हैं कि इससे ज्यादा और कुछ कहा नहीं जा सकता है.

इसलिये इससे उनकी संतुष्टिï बताकर उन्होंने यह ऐलान कर दिया कि वे कांग्रेस को समर्थन देंगे और जाहिर है कि कांग्रेस ने जिन पाटीदारों को टिकिट दिया है वे उनके लिये ही काम करेंगे.

लेकिन हार्दिक पटेल के साथ सभी पाटीदार हैं और उनकी एक आवाज पर सब उनके साथ हो गये- ऐसी स्थिति भी नहीं है. पाटीदार समाज में भी हार्दिक पटेल के प्रबल विरोध हो गये हैं जो उस पर निज स्वार्थ के लिये राजनैतिक दलों से सौदेबाजी करने के गंभीर आरोप लगा रही है. वहां से लोकसभा की 28 सीटें हैं और सभी भारतीय जनता पार्टी के पास हैं.

कांग्रेस में गुजरात के जबरदस्त नेता के रूप में श्री शंकरसिंह बघेला थे जो कुछ माह पूर्व ही कांग्रेस व राजनीतिक छोड़कर घर बैठ गये हैं. श्री बघेला कांग्रेस में आज से पूर्व भारतीय जनता पार्टी के भी कद्दावर नेता थे. वे जब भाजपा के सांसद थे तब उन्होंने गुजरात में भाजपा के मुख्यमंत्री श्री केशुभाई पटेल की सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोलकर उनकी सरकार को गिराया था.

 

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