नई दिल्ली,  सरकार घरेलू गेहूं उत्पादक किसानों को सस्ते आयात के असर से बचाने के लिए इस जिंस पर आयात शुल्क मार्च के बाद भी बरकरार रख सकती है क्योंकि इस महीने के अंत तक नए सीजन के गेहूं की आवक शुरू हो जाएगी।

खाद्य, कृषि एवं वाणिज्य मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श कर अब वित्त मंत्रालय इसका सितंबर तक विस्तार करने की योजना बना रहा है। गौरतलब है कि भारत चीन के बाद गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। विदेश से गेहूं के भारी आयात को देखते हुए सरकार ने पिछले साल अगस्त में करीब 8 साल बाद गेहूं के आयात पर 10 फीसदी शुल्क लगाया था।

अक्टूबर में सरकार ने आयात शुल्क बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया था। हालांकि इसकी मियाद 31 मार्च को पूरी हो रही है। सूत्रों ने कहा कि शुल्क के विस्तार के बाद प्रधानमंत्री मोदी जून में इस फैसले की समीक्षा करेंगे क्योंकि उस समय सरकार के पास इस सीजन में कुल उत्पादन के सटीक आंकड़े होंगे। हालांकि खाद्य मंत्रालय के प्रवक्ता एन सी जोशी ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
भारतीय किसान वर्ष में केवल एक बार गेहूं की फसल उगाते हैं और वे मार्च के अंत या अप्रैल से अपनी फसल की कटाई शुरू करेंगे। मौसम खराब होने की वजह से किसान और विशेषज्ञ गेहूं का उत्पादन कम होने की आशंका जता रहे हैं।
कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने अनुमान जताया है कि भारत में वर्ष 2016 के दौरान 9.2 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन होगा, जो सरकार के पिछले अनुमान के बराबर है। पिछले साल गेहूं का उत्पादन 8.65 करोड़ टन रहा था, जो इससे पिछले साल के उत्पादन 9.58 करोड़ टन से कम था। इसकी वजह फरवरी और मार्च में बारिश और ओले गिरना थी।

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