केन्द्र सरकार इन दिनों रबी की मुख्य फसल गेहूं की खरीददारी में जोरों से लगी है. उत्तरी राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार में यह काम चल रहा है. लेकिन देश में लगभग सभी फसलों खासकर गेहूं का उत्पादन जितनी मात्रा में होता है केंद्र व राज्य सरकारें उसके अनुसार खरीद केदं्रों, उसका परिवहन व भंडारण की व्यवस्था में लगातार असफल ही नजर आयी है.

इससे किसान तो परेशान होता ही है यदि इसी समय असमय की मानसून पूर्व की वर्षा आ जाने से लाखों टन अनाज सड़ जाता है. इस वक्त भी काश्मीर, हिमाचल व उत्तराखंड में बेमौसम का हिमपात हो रहा है और दिल्ली तक बेमौसम की वर्षा भी होने लगी है.

मध्यप्रदेश में बादल आ गये हैं और छुटपुट पानी का झल्ला भी आ जाता है. खरीदी केन्द्रों पर सभी राज्यों में किसानों की ट्रक ट्रालियां कई किलो मीटर लंबी लाइनों में खड़ी दिखायी दे रही हैं. आवक के हिसाब से खरीदी में रफ्तार नहीं है, जबकि स्थिति पहले से ही अनुमान में आ जाती है और एक ही जगह कई खरीदी काउंटर या केंद्र बनाये जा सकते हैं. इससे समय की बचत के साथ सरकार व किसानों दोनों का ही लाभ है.

केन्द्र सरकार इन दिनों गेहूं राज्यों में लगभग 20 लाख टन गेहूं की खरीदी नाफेड व एफ.सी.आई. के माध्यम से कर चुकी है. एफ.सी.आई. व सेंट्रल वेयर हाउसिंग गोदामों में गेहूं का स्टाक भी पहुंचाया जा रहा है. केन्द्र सरकार ने इस वर्ष 2018-19 के लिये 320 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है. पिछले साल एफ.सी.आई. ने 308 लाख टन गेहूं खरीदा था. गेहूं की अधिकांश खरीदी फसल कटाई के बाद पहले तीन महीनों में ही होती है.

मौजूदा समय में मध्यप्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में खरीदी चल रही है क्योंकि इन राज्यों में गेहूं का केंद्रों तक आना पूरे जोर पर है. आने वाले समय में पंजाब का गेहूं खरीदा जायेगा. पंजाब से केंद्र सरकार लगभग 120 लाख टन गेहूं खरीदेगा. केन्द्र की समर्थन मूल्य की खरीदा का लक्ष्य पूरा होने के बाद राज्य सरकारें गेहूं की खरीदी सरकारी न्यूनतम मूल्य पर ही करेगी.

मध्यप्रदेश सरकार भी उस समय के लिये तैयार हो रही है जब केन्द्र की खरीदी के बाद उसे गेहूं की खरीदी करनी है. इस समय राज्य में चना, मसूर और सरसों का उपार्जन अब 9 जून तक चलेगा, अभी तक इसकी अवधि 10 अप्रैल से 31 मई तक थी. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भी इस बात को जानते हैं कि राज्य में अभी अनाज परिवहन व भंडारण की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है.

उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि उपार्जन में व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत है. जहां किसानों की संख्या बढ़ जाए वहां अतिरिक्त केंद्र खोले जाने चाहिये. उपार्जन का काम कुछ ही महीनों में होता है और श्री चाहान का यह फैसला बड़ी राहत पहुंचायेगा कि किसानों की संख्या बढऩे पर अतिरिक्त केंद्र खोल दिये जाए. गेंहू के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा है कि अधिकारी यह सुनिश्चित करे कि समय पर गेहूं पर परिवहन व भंडारण हो जाए

चना, सरसो व मसूर की खेती के लिये लगभग 15 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है. प्रदेश में 347 उपार्जन केंद्र बनाये गये है और प्रत्येक किसान से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपार्जन की सीमा को खत्म कर दिया गया है,.

मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत 51 जिलों में 10 लाख से भी ज्यादा किसानों के बैंक खातों में इसी माह 15-10 अप्रैल तक 1677 करोड़ रुपये की राशि जमा कर दी जायेगी.

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