रबी की मुख्य फसल गेहूं जब सब तरह से तैयार होकर सरकारी खरीदी केन्द्रों तक आ गई है और देर बुआई की फसलें पक कर कटने को तैयार है उसी समय मध्य अप्रैल में बेमौसम की बरसात ने गेहूं के किसानों को जो फसल से खुशहाली देख रहा था- उसे बर्बाद कर दिया.

सैकड़ों एकड़ में फसल खराब हो गई. मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब सहित पूरे उत्तर भारत में तेज पानी ने किसानों की मेहनत पर ही पानी फेर दिया. एकाएक बहुत परेशानी आ गई है. सरकार को ऐसे में फौरन ही उन्हें तुरन्त सहायता पहुंचाने व मुआवजा की व्यवस्था करनी चाहिए.

कई जगहों पर बरसात की तेजी सावन की बरसात जैसी थी. इस साल पूरे उत्तर भारत में गेहूं की जोरदार फसल थी. केंद्र सरकार अभी मध्यप्रदेश, राजस्थान व उत्तरप्रदेश में गेहूं का उपार्जन कर रही है. खरीदी केन्द्रों पर गेहूं से लदी ट्रालियों की लाइनें लगी हैं.

ट्राली में पानी भर जाने से गेहूं पूरी तरह खराब हो गया. पंजाब में अभी गेहूं की फसल खेतों में ही है. लगभग एक महीने बाद मई में केंद्र सरकार की एजेंसियां नाफेड और एफ.सी.आई. खरीद करने जाने वाली है कि खेतों में आंधी पानी से फसल खेतों में ही खराब हो गई है.

अभी कछ दिन पहले काश्मीर में एकाएक भारी हिमपात होने पर मौसम विभाग ने पूरे देश को सतर्क कर दिया था कि काश्मीर से कर्नाटक तक द्रोणिका की पट्टी बन गई है और इसमें वर्षा होने की संभावना है. लेकिन सरकारों ने इस चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया और मुसीबत में फंस गए.

मध्यप्रदेश सरकार ने हर साल की तरह यह घोषणा अवश्य की थी कि इस साल खरीदी केंद्रों से अनाज परिवहन और भंडारण की समुचित व्यवस्था हो गई है. लेकिन वर्षा के दो दिनों में ही राजधानी भोपाल में 900 क्विंटल गेहूं भीग गया और इसे पूरा नष्ट ही माना जायेगा. जिले के 12 खरीदी केंद्रों में और करोंद मंडी में खुले में रखा सैकड़ों क्विंटल गेहूं भीग गया.

गेहूं की बोरियां पानी से तर हो गई हैं इन पर जो तिरपाल डाली गई थी वह भी तेज हवाओं में उड़ गई. हालत राजधानी भोपाल जिले की यह है कि 52 उपार्जन केंद्रों में अब तक करीब 10 लाख क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है. इसमें से 44 केंद्रों पर एक लाख 32 हजार टन गेहूं खुले में पड़ा है. इस नुकसान की जिम्मेवारी व जवाबदेही अफसर और विभाग दूसरे पर डाल रहे हैं.

ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर जिले में वर्षा, ओलों के साथ हवा भी बहुत तेज चली उससे गेहूं की फसल खेतों में लेट गई. खलियान में रखे गेहूं का दाना काला पड़ जायेगा. गेहूं की चमक खत्म हो जाने से उसका भाव बहुत गिर जाता है.

विंध्य क्षेत्र के सभी जिलों में वर्षा और आंधी ने फसलों में तबाही मचा दी है, जहां ओले भी गिरे हैं, वहां सब चौपट हो गया. मुरैना में चम्बल नदी पर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को जोडऩे वाला पीपों का पुल तेज हवा व पानी से टूटकर बह गया और 200 मीटर दूर चला गया. उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद व अमरोहा जिले में इतना ज्यादा पानी गिरा कि खेत पानी में डूब गए और पूरी फसल भी डूब गई.

मध्यप्रदेश में कई जगहों पर ओले गिरे हैं और मौसम विभाग ने भी चेतावनी दी है कि गुना, अशोक नगर, शिवपुरी तथा टीकमगढ़ में आगामी दो दिन ओलावृष्टिï की आशंका है.इस समय जो वर्षा हो रही है उसके साथ आंधी भी तेज चलती है. इस कारण फसलों पर पानी और ओलों की दोहरी मार पड़ रही है.

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