एक लंबी उहापोह के बाद गेहूं की सरकारी खरीद स्थिति स्पष्टï हो गयी और केंद्र सरकार उसकी खरीद एजेंसी फूड कार्पोरेशन आफ इंडिया (एफ.सी.आई.) के माध्यम से 2.8 करोड़ टन गेहूं खरीदेगी. अभी तक बेमौसम बरसात से खराब हो गये गेहूं के कारण केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और किसानों के बीच बड़ी उलझन, खींचतान और अनिश्चितता की स्थिति चल रही थी.

जबसे केंद्र सरकार की समर्थन मूल्य या अनाज, दलहन व तिलहनों को सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से सीधे तौैर पर खरीदने की नीति चल रही है उसमें पहली बार अपवाद स्वरूप यह स्थिति निर्मित हुई कि विदेशव्यापी स्तर पर रबी की सभी फसलें खासकर गेहूं की किस्म और उत्पादन पर इतना विपरीत प्रभाव पड़ा है. केंद्र सरकार ने खरीदी और अनाजों की किस्म व स्थिति के बारे में कुछ नियम स्टेडिंग आर्डर के रूप में निर्धारित किये हुए थे. जब तक ये नियम प्रभावशील रहे अधिकारी वर्ग अपने शासकीय कर्तव्य निर्वहन मेें उस गेहूं को नहीं खरीद रहे थे जो केंद्र द्वारा स्थापित मानको में नहीं आ रहे थे. पानी ओलों की मार के कारण गेहूं का उत्पादन व किस्म काफी गिर गयी. गेहूं में नमी आ गयी, चमक चली गयी और वह बड़ी तादाद में पतला पड़ गया खरीद केंद्रों पर लाने के समय भी बेमौसम बरसात लौट कर आ गयी और गेहूं से लदी ट्रालियों और केंद्र में रखे गेहूं के बोरों में पानी भर गया.

सरकारों, अधिकारियों व किसानों के सामने बड़ी ही अजबी स्थिति बनी हुई थी. मध्यप्रदेश सरकार ने किसान हित में चमकहीन व नमी वाला गेहूं किसानों से खरीदना भी शुरू कर दिया. लेकिन वे इस बात के लिए चिन्तित थे कि राज्य सरकारों मेें केंद्र के बफर स्टाक के लिये केन्द्र सरकार एफ.सी.आई. के माध्यम से वह गेहूँ खरीदती है और स्थापित मानकों के कारण आगे चलकर एफ.सी.आई. राज्यों से वह गेहूँ लेगा नहीं और राज्य सकरार का करोड़ों रुपया अटक जायेगा और बेतहाशा मात्रा में गेहूँ राज्य सरकार पर लद जायेगा- जितनी न तो खपत होगी और न ही जरूरत होगी. मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से स्वयं जाकर यह अनुरोध किया कि गेहूँ खरीदी के मानकों को अपवाद स्वरूप …… स्थिति में बदल दें जिससे किसानों से राज्य सरकारें गेहूँ खरीद सकें और एफ.सी.आई. राज्यों से भी वह गेहूँ खरीद ले.

केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय का कहना है कि खड़ी फसल बरबाद होने की वजह से इस साल गेहूँ खरीद पिछले साल के मुकाबले काफी कम रहेगी. लेकिन गुणवत्ता (क्वालिटी) नियमों में ढील दिये जाने के बाद से खरीदी में तेजी आई है. इसकी वजह से वर्ष 15-16 के फसल सीजन में 2.6 से 2.8 करोड़ टन तक गेहूँ खरीदने की उम्मीद हो गयी है. पहले सरकार ने 3 करोड़ टन गेहूँ खरीदने का लक्ष्य रखा था जो संभवत: पूरा नहीं हो पायेगा, थोड़ा सा ही कम रहेगा. निजी खरीद एजेंसियों की ओर से भी बड़ी खरीददारी न करने से एफ.सी.आई. और राज्य सरकारों के पास काफी गेहूँ खरीद-बिक्री के लिए आ जायेगा.

मध्यप्रदेश में अब तक समर्थन मूल्य पर किसानों से 52 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की खरीद की जा चुकी है और किसानों को 7,603 करोड़ रुपयों का भुगतान हो चुका है. प्रदेश में 25 मार्च से काम शुरू हुआ था और 26 मई तक चलेगा.
इस साल किसानों से गेहूं 1450 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जा रहा है. राज्य में 18 लाख 68 हजार किसानों ने गेहूँ बेचने के लिये उनका पंजीकरण
कराया है.

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