gram_udayभोपाल,  केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘ग्रामोदय से भारत उदय अभियान’ का 14 से 16 अप्रैल तक चला पहला चरण जनता और जनप्रतिनिधियों, दोनों की ही भागीदारी से दूर दिखाई दे रहा है। हालांकि रस्मअदायगी के तौर पर दलितों के मसीहा डॉ भीमराव अंबेडकर प्रतीकात्मक तौर पर पंचायत-पंचायत पहुंचे, लेकिन कार्यक्रमों में दलितों की ही गैरमौजूदगी सामाजिक समरसता के संदेश को फीका करती दिखी।

ग्रामीण परिवेश के लिहाज से देश का एक अहम हिस्सा माने जाने वाले बुंदेलखंड की कई ग्रामपंचायतों में मैदानी आंकलन के दौरान यूनीवार्ता संवाददाता को लगभग यही स्थिति देखने को मिली। कई ग्राम पंचायतों में 14 अप्रैल को हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के दौरान जनता को उसकी सूचना ही नहीं मिल पाने से कोरम पूरा नहीं हुआ, तो वहीं कुछ ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधि पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिल पाने से अभियान के सबसे अहम कार्यक्रम ‘ग्राम संसद’ से अंजान दिखे।

इसका कारण पूछे जाने पर लोगों ने स्वीकारा कि न तो गांव में इसकी उचित जानकारी मिल पाई और न ही गांव के प्रमुख लोगों को इस अभियान से जोडा जा रहा है। गांव के जिम्मेदार लोगों की मानें तो अधिकारी स्वयं ग्राम सभाओं के सुव्यवस्थित संचालन में रुचि नहीं लेते, तो वहीं जिम्मेदार अधिकारी अभियान के प्रथम चरण को ‘जल्दबाजी में तैयार’ किया गया बताकर पल्ला झाडने की कोशिश करते दिख रहे हैं।

राजधानी के आसपास के कई इलाकों में भी प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान अंगुलियों पर गिने जा सकने वाले लोगों की मौजूदगी दर्ज हुई। कोरम पूरा करने के लिए आते-जाते कई लोगों से हस्ताक्षर कराए जाने के मामले भी सामने आए।
राजधानी भोपाल से सटे रातीबड और बैरसिया नगरपालिका क्षेत्र में अभियान से जुडे एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान कई स्थानों पर ग्राम पंचायतों में लोगों को कार्यक्रम के बारे में सूचना नहीं मिलने की शिकायतें मिलीं। अधिकारी के मुताबिक कई ग्राम पंचायतों में उन्होंने स्वयं जाकर प्रधानमंत्री के संबोधन के लिए टीवी चलवाए। वहीं लगभग सात ग्राम पंचायतों में एक भी महिला की मौजूदगी नहीं दिखाई दी।

बीना जनपद पंचायत के ग्राम बामौरा में स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक कार्यक्रम के बारे में उसी दिन मुनादी हुई, जिसके चलते लोगों को सूचना नहीं मिली। यहां जिस स्थान पर कार्यक्रम के प्रसारण की व्यवस्था की गई थी, वहां कुल संख्या 5600 के मुकाबले कोरम के 10 फीसदी यानी 56 लोगों के भी ठीक से बैठने की व्यवस्था नहीं थी। बामौरा सरपंच मुन्नी बाई ने पूरे कार्यक्रम के बारे में कोई भी जानकारी होने से स्पष्ट इंकार कर दिया।

कार्यक्रम के दौरान कोरम पूरा नहीं होने संबंधित सवाल के जवाब में बामौरा ग्राम पंचायत के नोडल अधिकारी आरके ओझा ने लापरवाह अंदाज में कहा कि कार्यक्रम के दिन गांव में स्थानीय बाजार लगा होने के कारण ग्रामीणों का रुझान उस ओर रहा और इसके चलते लोग कार्यक्रम में नहीं पहुंचे।

नजदीकी गौहर ग्राम पंचायत के सरपंच श्याम मनोहर पटेल स्वयं कार्यक्रम में मौजूद ही नहीं रहे। श्री पटेल के स्थान पर कार्यक्रम की व्यवस्थाएं संभालने वाली सचिव सुनीता दीक्षित के मुताबिक अभियान के लिए सभी कार्यक्रम तय कर लिए गए हैं, लेकिन क्या कार्यक्रम तय किए गए हैं, इस बारे में पूछे जाने पर वे ‘ग्राम संसद’ समेत सभी आयोजनों से अनभिज्ञ दिखाई दीं।

नजदीकी ग्राम पंचायत सनाई के सचिव शिवचरण सेन को अभियान के नोडल अधिकारी के बारे में ही पता नहीं था। तो वहीं विंधई ग्राम पंचायत के सचिव कैलाश प्रसाद चौरसिया ने प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान कुल 600 में से 40 लोगों की मौजूदगी की जानकारी दी, वे भी कार्यक्रम में एक समय पर मौजूद नहीं रहे। लगभग सभी ग्राम पंचायतों में महिलाओं और दलितों की मौजूदगी ना के बराबर रही। हालांकि कोरम पूरा करने के लिए महिलाओं से भी हस्ताक्षर करवाने जैसी स्थितियां देखने को मिलीं।

अभियान के प्रथम चरण से जनता की दूरी को एक हद तक स्वीकार करते हुए बीना अनुविभागीय दंडाधिकारी रजनी सिंह ने यूनीवार्ता से कहा कि कार्यक्रम के बारे में एक-दो दिन पहले ही सूचना मिली थी और ऐसे में कई स्थानों पर हो सकता है कि मुनादी नहीं होने से नागरिकों तक सूचना नहीं पहुंची हो। श्रीमती सिंह ने स्वीकारा कि पटवारी और तहसीलदारों को ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण दिया गया, लेकिन पंचायत सचिवों और जनप्रतिनिधियों का प्रशिक्षण संभवत: पूरा नहीं हो पाया है।

सागर जिला कलेक्टर विकास नरवाल हालांकि जनता और जनप्रतिनिधियों की गैर मौजूदगी को पूरी तरह नकारते हुए कहते हैं कि अभियान बहुत व्यापक है, शुरूआती दौर में हो सकता है कुछ अनियमितताओं के मामले सामने आए हों, लेकिन अगले चरण में उन्हें पूरी तरह दूर कर लिया जाएगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विधायकों समेत सभी जनप्रतिनिधियों को इस बारे में फोल्डर भी भेजे गए हैं और उनका प्रशिक्षण भी कराया जा रहा है।

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