16.06sag 08बीना। बीना तहसील क्षेत्र के ग्राम कोटवारों द्वारा तहसील पहुंचकर महामहिम राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया है कि विगत दिनों समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार जिसमें मंत्रालय के मुख्य सचिव अंटोनी जेसी डिसा की अध्यक्षता में हुई वरिष्ठ सचिव समिति की बैठक में फैसला लिया गया कि भू-राजस्व संहिता 1959 के नियमों में बदलाव कर म.प्र. के समस्त कोटवारों की भूमि जो उन्हें शासन से प्राप्त हुई है उसे वापिस ली जाये। गरीब ग्रामीण कोटवारों का कहना है कि उक्त निर्णय से गरीब ग्राम कोटवारों को कई प्रकार की परेशानियां आ जायेंगी। शासन से बंजर ऊबड़-खाबड़ जमीन प्राप्त हुई थी जिन्हें उन्होंने कड़ी मेहनत कर फसल उगाने लायक बनाया।

उक्त भूमियों के द्वारा ही वे अपने परिवार का भरण पोषण कर पाते हैं। अधिकतर कोटवारों के पास यही भूमियां है इसके अलावा उनके पास अन्य कोई कृषि भूमि नहीं है। यदि उक्त भूमि ग्राम कोटवार से वापिस ले ली जायेगी तो वह और उसका परिवार भूमिहीन हो जायेगा। उसके समक्ष अपने परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो जायेगा। उसकी आर्थिक स्थिति काफी दयनीय हो जायेगी। ग्राम कोटवारों के पास वर्तमान में जो भूमियां हैं उसके कारण उसे या उसके परिवार को भूमिहीन नहीं माना गया और कई बार पूर्व में शासन द्वारा चलाई गई भूमिहीनों की योजनाओं का लाभ प्राप्त नहीं हो सका है।

ग्राम कोटवारों के पास अपने परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र साधन यही शासन से प्राप्त भूमियां ही हैं। साथ ही हमारी कई पीढिय़ां पीढ़ी दर पीढ़ी शासन की सेवा करती आ रही है और उन्हें सेवा के रूप में मात्र यह भूमि प्राप्त हुई है जिसके द्वारा हमारे पूर्वज व हम अपने परिवार का पालन-पोषण करते चले आ रहे हैं। हमारे परिवार का भविष्य पूर्ण रूप से इन्हीं भूमियों पर निर्भर है। हम सभी कोटवार अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के अंतर्गत आते हैं, यदि शासन द्वारा नियम में बदलाव कर हमको प्राप्त भूमियां वापिस ली जाती हैं तो ऐसा करना एक ही वर्ग विशेष के साथ की गई कार्रवाई होगी।

ज्ञापन के माध्यम से मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव एवं अन्य वरिष्ठ सचिवों के मध्य बैठक में जो मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता के नियमों में बदलाव कर ग्राम कोटवारों की भूमि को शासन द्वारा वापस लेने का निर्णय लिया गया है उस निर्णय को असली जामा पहनाने से रोकने की मांग की गई है जिससे ग्राम कोटवारों को समस्याओं का सामना न करना पड़े।

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