ग्रीस (यूनान) यूरोप के पूर्व में स्थित बहुत छोटा सा राष्टï्र है. जिसका यूरोप या विश्व व्यापार पर बहुत गहरा प्रभाव तो नहीं है लेकिन यूरोपीय यूनियन और यूरो जोन का सदस्य होने के नाते उसके आर्थिक दिवालिया होने से यूरोपीय और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है. इस समय विश्व में आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है. इन परिस्थितियों में वैश्विक निवेशकों व बहुराष्टï्रीय कंपनियों के लिये भारत और चीन दोनों ही तेजी से बढ़ती जा रही अर्थव्यवस्थाओं के रूप में आर्थिक जगत में ‘ब्राइट स्पाटÓ कहे जा रहे है. इन दिनों चीन की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट दर्ज की गयी है. चीन के बाजार 30 प्रतिशत टूट चुके है और वहां ट्रैडिंग तक रोकनी पड़ी. पिछले माह 12 जून से चीन के बाजारों में गिरावट से कोहराम मचा हुआ है. इसके कारण चीन के बाजारों का लगभग 3 खरब डालर का मार्केट कैप खत्म हो गया. जो उसके जी.डी.पी. के 50 प्रतिशत के बराबर है.
चीन के बाजारों का असर भारत के बाजारों पर भी प्रतिकूल असर का बन गया. सेंसेक्स में 500 से ज्यादा अंकों की गिरावट और निफ्टी 8400 अंक नीचे गया. मुंबई शेयर बाजार में निवेशकों को 1.33 लाख करोड़ का भारी घाटा हो गया और बाजार का पूंजीकरण घटकर 1,02,55,829 पर आ गया.

इस शुरुआती प्रभाव के बाद व्यापार जगत यह मान रहा है कि चीन की गिरावट भारत की आर्थिक साख को बहुत बढ़ाने जा रही है. निवेशक भारतीय इकानामी को स्थिर और लाभदायक पा रहे हैं. आने वाले दिनों में भारतीय अर्थव्यवस्था को ग्रीस व चीन की आर्थिक डांवाडोल स्थिति मजबूत करती नजर आयेगी.
यूरोपीय यूनियन ग्रीस के जनमत संग्रह और उसके अडिय़ल रवैये से परेशान है. ग्रीस पर बुलाये यूरोपीय यूनियन के शिखर सम्मेलन में ग्रीस ने अपनी तरफ से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया कि वह देश की आर्थिक संकट से कैसे उबरना चाहता है. उसे एक और मौका दिया गया है. निकट भविष्य में ग्रीस दिवालिया संकट का कोई निदान नजर नहीं आ रहा है. ग्रीस की अंदरूनी और वहां के लोगों की आर्थिक हालत दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है. वहां के प्रधानमंत्री श्री सिपरस ने कुछ दिनों पूर्व आश्वस्त किया था कि सरकार के खजाने में शासकीय सेवकों के वेतन व पेंशन के लिए पूरा पैसा है लेकिन कुछ दिनों में ही यह हालत हो गयी कि पेंशन पर आश्रित लोगों को बैंकों ने पेंशन भुगतान करने से इंकार कर दिया है. वहां के लोगों के सामने भुखमरी की स्थिति आ गयी है.

चीन की स्थिति विश्व में मंदी की आशंका बढ़ा रही है. सन् 2008 की वैश्विक मंदी संकट के बाद चीन के शेयर बाजार में अब सबसे बड़ी गिरावट आयी है.
एक पखवाड़ा पहले भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री रघुराम राजन ने कहा था कि दुनिया में ऐसे आर्थिक हालात बन रहे हैं कि सन् 1930 की भयानक मंदी की पुनरावृत्ति हो सकती है. उस स्थिति में भी भारतीय अर्थव्यवस्था सुरक्षित रहेगी. भारत पर इस समय एक ही बड़ा आर्थिक संकट है कि बेमौसम बरसात ने रबी की पूरी फसल बिगाड़ दी और अब खरीफ के समय दक्षिण पश्चिम मानसून कमजोर है.

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