यूरोपीय यूनियन और यूरोजोन के सदस्य राष्टï्र ग्रीस (यूनान) में आर्थिक संकट चरम सीमा पर पहुंच गया है और प्रधानमंत्री एलेक्सिस सिपरस और संसद देश में जनमत संग्रह से इस संकट से उबरने का जनादेश मांग रहे है. देश में सभी बैंक बंद कर दिये गये हैं. केवल जमाकर्ताओं (डिपाजिटर्स) को 60 यूरो प्रतिदिन निकालने की मुद्रा सिलिंग लगा दी गयी है. राष्टï्र के सभी शेयर बाजार बंद हो गये हंै. ग्रीस सरकार ने घाटे की अर्थव्यवस्था इतने ज्यादा वर्षों से चलायी कि उसनेे विदेशों से विकास के लिये जो कर्ज ले रखा था उसे चुकाने की स्थिति में नहीं है. ग्रीस सरकार कर्जदारों से यह आग्रह कर रही है कि वे या तो कर्जा माफ कर दे या उस पर लगा ब्याज छोड़ दे. यह तक हालत बन गयी है कि वह देशी और विदेशी राष्टï्रों और अंतरराष्टï्रीय वित्तीय संस्थाओं से लिये कर्जों पर अस्थाई रोक (मोरीटोरियम) लगा दे कि अभी वह चुकाने की स्थिति में नहीं है और आगे कभी वित्तीय स्थिति सम्हालने व सुधरने पर उनका कर्जा धीरे-धीरे चुका देगा. देशी और विदेशी निवेशकों को पूंजी डूबने का खतरा पैदा हो गया है. अंतरराष्टï्रीय मुद्राकोष (आई.एस.एफ.) ने ग्रीस को कुछ उधार देने के संकेत दिये है. यूरो राष्टï्र भी ग्रीस को कर्ज देने को तैयार है लेकिन उन्होंने शर्तें लगायी हैं कि वह अपना खर्च कम करे वेतन वृद्धि न करे, पेंशन पर रोक लगाये आदि आदि. वहां पहले भी ऐसी शर्तें लगायी जा चुकी हैं और मितव्ययता के कदम उठाते ही राष्टï्र में विरोध के जन-आक्रोश व जन-आंदोलन भड़क उठते हैं. अब सरकार जनमत संग्रह से ही यह जानना चाहती है कि इस संकट से उबरने के लिए क्या कदम उठाये जाएं.
ग्रीस में घाटे की अर्थव्यवस्था (घाटे का बजट) के कारण एक लंबे अरसे से आर्थिक संकट बना हुआ है. उसके सहयोगी यूरो राष्टï्र उसे आर्थिक पैकेज समयबद्ध टाइम कार्यक्रम के तहत दे रहे हैं और उन्हें इस कार्यक्रम की तारीख को आगे बढ़ाने से इंकार कर दिया और कड़ी आर्थिक शर्तें लगायी हैं तभी वे आगे कुछ करने का फैसला करेंगे.

ग्रीस को अंतरराष्टï्रीय मुद्राकोष (आई.एस.एफ.) का 1.6 अरब यूरो का कर्जा 30 जून तक चुकाना है और इसी दिन उसके यूरोपीय यूनियन का सहायता पैकेज की तिथि भी समाप्त हो रही है. ग्रीस किसी भी तरह इतना बड़ा कर्जा चुकाने की स्थिति में नहीं है. संभावना है कि अंतरराष्टï्रीय मुद्राकोष ही बिना पिछला कर्जा वापस पाये आगे और कुछ कर्ज दे दे. ग्रीस आर्थिक संकट का वैश्विक शेयर बाजार, वैश्विक निवेश पर अल्पकालीन के लिए प्रभाव अवश्य पड़ेगा. भारत पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव तो नहीं लेकिन अप्रत्यक्ष (साइड इफेक्ट) रूप से आर्थिक प्रभाव जरूर होगा. विदेशी निवेश यूरोपीय संकट से पहले भी और आगे भी प्रभावित होते रहे हैं. यूरो जोन में आयात-निर्यात गड़बड़ा
जाता है.

यूनान ऋण संकट से भारत शेयर बाजार की चाल तय होगी. ग्रीस संकट ने वैश्विक मंदी और आयात निर्यात बाजार से पहले से ही प्रभावित कर दिया है.
यह भी संभावनाएं बन रही हैं कि ग्रीस यूरो जोन से बाहर आ जाए और उसकी करेंसी यूरो से ”डी लिंकÓÓ हो जाए. ग्रीस की वजह से ”यूरो संकटÓÓ उस समय और गहरा जायेगा जब उसे प्रतिद्वंदी ”डालर मुद्राÓÓ की शरण में ग्रीस को उबारने के लिए जाना होगा. उससे न सिर्फ डालर के मुकाबले यूरो मुद्रा बल्कि अमेरिका के मुकाबले यूरोपीय यूनियन (ई.यू.) का भी राजनैतिक महत्व कम हो जायेगा. प्रश्न यह पैदा हो गया कि क्या अमेरिका ही ग्रीस को उबारने आगे आएगा?