mp4ग्वालियर,  केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने कहा है कि ग्वालियर आगामी पांच साल में प्लास्टिक हब बनेगा। इसके लिये केन्द्र सरकार एक हजार करोड़ देगी, जबकि मध्यप्रदेश सरकार डीपीआर तैयार करेगी।
प्लास्टिक पार्क के लिये मध्यप्रदेश सरकार ने 73 एकड़ जमीन भी मुहैया करा दी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को खाद पर मिलने वाली सबसिडी को यथावत रहेगी।

केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार ने आज अपने प्रवास के दौरान यहां पत्रकारों से चर्चा में कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा पूरे देश में प्रत्येक मंत्री को दो दो लोकसभा क्षेत्रों में तीस घंटे का समय देने को कहा है उसी के तहत यहां कार्यकर्ता सम्मेलन के साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की जानकारी लोगों को देने के लिए वह ग्वालियर आए हैं। उन्होंने आज तक वह लगभग 12 घंटे के लिए आए हैं जिसमें वह सरकार की जानकारी दे रहे हैं इसके बाद वह जब आएंगे तब ग्वालियर में बनने वाले प्लास्टिक पार्क को मूर्त रूप देेने आएंगे। प्लास्टिक पार्क के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने 73 एकड़ जमीन मुहैया कराई गई है।

वहीं इसके इन्फ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने के लिए केन्द्र सरकार एक हजार करोड़ रुपया देगी, जबकि डीपीआर बनाने के लिए मप्र शासन से कहा गया है। इससे लगभग पांच से दस हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। इसी के साथ सेन्ट्रल इंस्टीटयूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग की स्थापना भी की जाएगी। इसकी शुरूआत में लगभग दो हजार बच्चे इसमें पढेंगे बाद में इसकी संख्या को और बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए दस एकड़ जमीन की जरूरत है, जो मध्यप्रदेश सरकार देगी। उससे पहले इसी वर्ष अप्रैल और मई माह से इसकी शुरूआत कहीं निजी कैम्पस में की जाएगी। आईटी जैसे ही प्लास्टिक टेक्रोलोजी पीटी भी होगी।

उन्होंने बताया कि देश में रसायन खाद की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उनके मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिलकर उनके यहां खपत की जानकरी ली और उसी के हिसाब से पहले ही सभी प्रकार की खाद को उन्हें मुहैया कराया गया। इतना ही नहीं उनके विभाग द्वारा नीम कोटेड खाद को मुहैया कराया जा रहा है। वहीं उसकी कालाबाजारी ना हो इसके लिए बोरियों पर बारकोडिंग कराई जा रहीं है। उन्हें पता चला कि सबसिडी वाला खाद किसानों से पहुंचने से पहले ही दूसरे रास्ते से कंपनियों में पहुंच जाता था। उसे पूरी तरह से रोकने का प्रयास किया गया है।

अब नीम कोटेड खाद सीधा किसानों के पास पहुंच रहा है। कोटिंग खाद से किसानों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि देश में अस्सी लाख मेट्रिक टन खाद को आयात किया जाता है। आगे आने वाले सालों में हम स्वयं खाद का आयात नहीं निर्यात करने लगेंगे। इसके लिए शीघ्र ही रामगुंडम का कारखाना लगेगा। वहीं महाराष्ट्र के कारखाने का विस्तार किया जाएगा।

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