मध्यान्ह भोजन हड़प रहे बिचौलिये

नवभारत न्यूज गंजबासौदा,

गरीब छात्र छात्राओं को शासकीय विद्यालयों में जो मध्यान्ह भोजन दिया जा रहा है उसकी काफी राशि बिचौलिये हड़प रहे हैं.

छात्रों को नियमानुसार सप्ताह भर जो स्वादिष्ट मीनू भोजन देना चाहिये वो नहीं मिल रहा. घटिया मसाले से बनी सब्जी, पापडऩुमा बेस्वाद रोटियां भिखारियों की तरह दी जाती हैं. अनेक छात्र तो वेस्वाद होने के कारण उसे खाते नहीं हैं. परंतु उनकी भोजन में एंट्री की जाती है, रजिस्टर हाजिरी से संख्या जोड़ी जाती है,जबकि बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं ये खाना नहीं खाते क्योंकि खाना घटिया होता है.

अध्यापक नहीं कर पाते विरोध विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को बनाये गये भोजन को चखना चाहिये परंतु उन्हें भोजन चखाया नहीं जाता. दबंग और प्रभावशाली बिचौलिये, जो फर्जी समूह बनाकर नाम किसी का और काम किसी का गड़बड़झाला करने वाले इतने प्रभावशाली और सत्तारूढ़ दल के नेताओं के मुंह लगे होते हैं कि कोई विरोध नहीं करता.

इस स्थिति में गरीब छात्र-छात्राओं को अच्छा भोजन नसीब नहीं होता. स्वच्छता का भी ध्यान नहीं रखा जाता. कई बार भोजन में इल्ली कीड़े निकल चुके हैं.

बेस्वाद कच्ची सब्जी अधसिकी रोटियां परोसी जाती हैं. अनेक स्कूलों में पराठे सप्ताह में एक दिन मिलना चाहिये परंतु कभी नहीं बनाये जाते. यह जांच का मुद्दा है परंतु अंधेरगर्दी चल रही है, इसके लिये वरिष्ठ अधिकारी दोषी हैं.

समूह बनाने में होता फर्जीवाड़ा

प्राप्त जानकारी के अनुसार महिला समूह बनाने गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली महिलाओं के नाम उनके दस्तावेज, फोटो, अंगूठा निशान लेकर समूह बना लिया जाता है. उन्हीं में से अध्यक्ष और सचिव कागजों में बना दिये जाते हैं.

इसके बाद उन्हें कोई जानकारी नहीं होती कि उनके नाम पर क्या चल रहा है? कभी जांच पड़ताल नहीं होती. वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं रहता. गोपनीय रूप से जांच होने पर सारी स्थिति सामने आ सकती है, परंतु जांच करेगा कौन?

तबादले का सताता रहता डर

विचोलियों से शिक्षक डरते हैं क्योंकि कहीं उनका स्थानांतरण न करा दिया जाये. इस कारण वो लोग बच्चों के भोजन में कमीशनखोरी करने वालों का विरोध नहीं करते और आंखें बंद करके हस्ताक्षर कर देते हैं. इसी में वो अपनी भलाई समझते हैं.

जब अनुविभागीय अधिकारी और मुख्य नपा अधिकारी शिकायत करने के बाद इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं देते, सारे अधिकार होने के बाद कार्यवाही नहीं करते, फिर इस स्थिति में बेचारे शिक्षक क्यों पंगा मोल लें?

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