कोच्चि. काजू की बढ़ती घरेलू खपत के कारण इसके निर्यार्त पर असर पड़ रहा है. काजू की घरेलू डिमांड सालाना 15 फीसदी बढ़ रही है, इसकी खपत के मामले में भारत ने अमेरिका और यूरोप को भी पीछे छोड़ दिया है. अमेरिका और यूरोप ही भारतीय काजू के प्रमुख खरीदार हैं.

निर्यातक पंकज एन संपत के अनुसार भारत में काजू की सालाना खपत करीब 2 लाख टन है. वहीं, अमेरिका में इसकी खपत करीब 1.3 लाख टन और यूरोप में 80,000 टन है. भारत का सालाना काजू निर्यात 1.1-1.2 लाख टन है. काजू की खपत बढऩे के साथ ही इसकी प्रोसेसिंग का दायरा भी बढ़ रहा है. पहले काजू की प्रोसेसिंग दक्षिण भारत के चार राज्यों तक ही सीमित थी, लेकिन अब यह दूसरी जगहों में भी फैल रही है.

कारोबारी प्रकाश राव ने बताया, पिछले कुछ सालों से गुजरात, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में भी बड़े पैमाने पर काजू की प्रोसेसिंग हो रही है. राव ने बताया कि इससे काजू प्रोसेसर्स की संख्या बढ़ी है और प्रोसेसिंग की उपलब्धता पर दबाव पैदा हुआ है. राव का कहना है कि भारत में काजू की खपत इसके निर्यात के मुकाबले कहीं तेजी से बढ़ रही है. लोकल मार्केट में खपत में आई तेजी ने निर्यार्त ग्रोथ पर सीधा असर डाला है. काजू भारत के लिए विदेशी मुद्रा की कमाई का प्रमुख जरिया है. काजू निर्यात के अधिकारिक आंकड़े अभी तक नहीं आए हैं, लेकिन अनुमान के मुताबिक फाइनेंशियल ईयर 2014-15 में काजू निर्यात की वैल्यू 5,000 करोड़ रुपये को पार कर गई है. फरवरी 2015 तक 4,986 करोड़ रुपये मूल्य का काजू निर्यार्त किया गया. वियतनाम काजू का प्रमुख उत्पादक मुल्क है और यह अपने प्रॉडक्शन का लगभग पूरा हिस्सा निर्यात कर देता है, क्योंकि यह घरेलू खपत मामूली है. इंपोर्टेड रॉ काजू नट्स की ऊंची कीमतों, बढ़ती प्रॉडक्शन कॉस्ट और वर्ल्ड मार्केट में काजू की कीमतों में नरमी के कारण निर्यार्त के मोर्चे पर मुश्किलें झेलनी पड़ रही है. कैलाश काजू निर्यार्त्स के प्रोपाइटर पी सोमराजन का कहना है, च्केरल में वेतन में 35 फीसदी की बढ़ोतरी लागू हुई है और रॉ काजू की कीमतें करीब 1,200 डॉलर प्रति टन के स्तर पर हैं, ऐसे में केरल में कई प्रोसेसिंग प्लांट बंद रहने को मजबूर हैं. 3.30-3.40 डॉलर प्रति पाउंड की मौजूदा कीमत पर निर्यार्त में गिरावट देखने को मिल रही है.

निर्यात इनसेंटिव्स घटाए जाने से भी काजू के निर्यात को झटका लगा है. इस बीच, भारत में काजू का प्रॉडक्शन कमजोर रहने के कारण इसकी कीमतों में तेजी आने की उम्मीद है. भारत में सामान्य तौर पर सालाना 6 लाख टन रॉ काजू का उत्पादन होता है, जबकि 7-8 लाख टन रॉ काजू को प्रोसेसिंग के लिए इंपोर्ट किया जाता है. बाद में उसका निर्यात होता है.

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