घर तो सभी को सुरक्षा और निजता देता ही है. सबका एक बड़ा सपना यह भी होता है कि उसका अपना घर हो. देश की बढ़ती आबादी न सिर्फ बड़े नगरों बल्कि अन्य सभी नगरों, कस्बों में भी आवास की मांग तेजी से बढ़ी. इसी माहौल में देश में वैध और अवैध आवासीय कालोनी का दौर आया जिसे ‘बिल्डर बूम’ कहा जाने लगा है.

इस धंधे में मांग और पैसा बहुत होने से बड़े पैमाने पर अपराधी तत्व भी कालोनी बिल्डर बन गये और खरीददारों को तरह-तरह की परेशानियां होने लगी है. धंधे में धोखाधड़ी, घटिया निर्माण में लोगों की भारी रकम भी डूब गयी.

लंबे इंतजार के बाद लोगों को मकान या प्लाट नहीं मिलें. रियल एस्टेट पर माफियाओं का शिकंज कसता चला गया. इस समस्या पर कुछ फिल्में भी बनने लगी- ‘घरोंदा’- ‘खोसला का घोसला’ आदि. रजिस्ट्री के स्थान पर पावर आफ अटार्नी में भी बड़े धोखे के गोरखधंधे हुए. मकानों को बनाने में जानबूझकर देरी लगायी गयी. ज्यादा रुपया मांगने लगे या मकान ही नहीं दिया. ऊपर से शो-बाजी का रंग रोगन कर मकान को अंदर से इतनी घटिया निर्माण सामग्री से बनाया कि पहले ही साल घर खरीदने वाले को रखरखाव व मरम्मत पर भारी खर्च करना पड़े.

कांग्रेस नेतृत्व की यू.पी.ए. सरकार द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक पर तो भाजपा की मोदी सरकार ने इसे लगभग 20 संशोधनों के साथ प्रस्तुत किया. कांग्रेस के समर्थन से यह राज्यसभा में पारित हो गया. इसमें संशोधन हुये हैं इसलिये लोकसभा में जायेगा और वहां भी इसका पारित हो जाना निश्चित ही है. इसमें बिल्डर को समय पर मकान देना होगा, देरी पर खरीददार को बैंक के बराबर ब्याज देना होगा और मकान में खराबी होने पर बिल्डर खरीददार को आफ्टर सेल सर्विस भी देगा. राज्यों में रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण बनेगा. बिल्डर व एजेन्टों का पंजीकरण होगा. प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी देना होगी. दोषी पाये जाने पर बिल्डर को तीन साल तक की सजा भी हो
सकती है.

रियल एस्टेट का व्यापार कृषि के बाद दूसरा बड़ा व्यापार बन गया है. जी.डी.पी. में इसका 9 प्रतिशत भाग है. हर साल 10 लाख से ज्यादा लोग मकान खरीदते हैं. इसमें लगभग 4 लाख करोड़ का निवेश होता है. करीब 30 बड़े शहरों में 80 हजार रियल एस्टेट कम्पनियां काम कर रही हैं.

हर प्रोजेक्ट का पंजीकरण होने से देश में माफियाओं द्वारा अवैध कालोनियों द्वारा लोगों का भारी शोषण हो रहा है- अब वह रुक पायेगा. अभी तक रियल एस्टेट की हर गतिविधि कानूनी दायरे से बाहर चल रही थी, अब सभी कुछ कानून के दायरे में सख्ती से आ गया है. जन-सुविधा व संरक्षण के दृष्टिï से यह जन-कल्याण का बहुत बड़ा कदम है. अब सब कुछ वैध हो गया है.

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