भारत-ईरान-अफगानिस्तान के बीच ईरानके समुद्री तट पर भारत ने चाबहार में एक बंदरगाह विकसित किया जिसके प्रथम चरण का उद्घाटन ईरान के राष्ट्रपति श्री हसन रुहानी ने किया. इस अवसर पर भारत से अफगानिस्तान को भेजे जा रहे गेहूं की तीसरी खेप 15 हजार टन गेहूं से लदा जहाज चाबहार बंदरगाह पर पहुंचा.

भारत इससे पहले गेहूं की दो खेप जहाजों से इसी बंदरगाह के रास्ते भेज चुका है. अभी तक भारत का जो भी व्यापार होता था वह पाकिस्तान होकर वहां पहुंचता था. लेकिन भारत और अफगानिस्तान के बीच इसी चाबहार बंदरगाह से व्यापार होगा. अभी तक भौगोलिक दृष्टिï से अफगानिस्तान दूसरे देशों से घिरा (लैंड लाक्ड) देश है. लेकिन चाबहार बन्दरगाह से वह समुद्र मार्ग के बहुत ही करीब आ गया है.

यहां से अफगानिस्तान आने-जाने की दूरी बहुत कम हो गयी है. 2016 में भारत-ईरान-अफगानिस्तान में इस बन्दरगाह के लिए समझौता हुआ था. यह चाबहार बन्दरगाह पाकिस्तान में चीन द्वारा बनाये गये ग्वादर बन्दरगाह के बिल्कुल पास है. चाबहार बन्दरगाह को भारत का चीन को जवाब भी माना जा रहा है.

चीन इन दिनों श्रीलंका में भी एक बन्दरगाह विकसित कर रहा है, जिसके बारे में श्रीलंका ने यह सफाई दी है कि वह केवल व्यापारिक बन्दरगाह है और वहां चीन के युद्धपोत नहीं आने दिये जायेंगे. ग्वादर चीन और पाकिस्तान के बीच चीन द्वारा बनाये गये इकोनोमिक कोरीडोर का दूसरा सिरा है. पहला सिरा चीन में है.

इस कोरीडोर से चीन पश्चिमी देशों से व्यापार के लिये प्रयोग करता है. इससे उसकी समुद्री मार्ग की प्रशांत व हिन्द महासागर होकर जाने वाली दूरी काफी कम हो जाती है. लेकिन चीन ने ग्वादर में अपने युद्धपोत भी तैनात कर दिये हैं.

भारत-ईरान व अफगानिस्तान को भी इस बन्दरगाह से ट्रान्सपोर्ट की लागत व समय में काफी कमी आ जायेगी. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब अफगानिस्तान की पाकिस्तान के रास्ते ही गुजरने की मजबूरी खत्म हो गयी जिससे स्वावलम्बन को बल मिला है.

इस बन्दरगाह को अब भारत-ईरान व रूस की साझा परियोजना अंतराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कोरीडोर से जोड़ा जायेगा. यह भी पाक-चीन आर्थिक गलियारे का एक जवाब है. इस बन्दरगाह से रूस और पूरा यूरोप भी जुडऩे जा रहा है. चाबहार भारत के कांडला बन्दरगाह से बहुत करीब है.

इस बन्दरगाह से अरब के कई राष्ट्र हिन्द महासागर तक आसानी से जा सकेंगे. पश्चिमी समुद्र तट पर चाबहार बंदरगाह का भारत के लिये रणनैतिक महत्व भी है. यदि चीन पाकिस्तान ग्वादर मेें अपने युद्धपोत तैनात करता है तो भारत भी चाबहार में अपने युद्धपोत तैनात कर सकेगा.

यह माना जा रहा है कि ग्वादर व चाबहार व्यापारिक बंदरगाह ही बने रहना चाहिए. चीन को ग्वादर से युद्धपोत हटा लेना चाहिए.

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