जोशीमठ,  उत्तराखंड में यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ एवं बदरीनाथ को 12 महीने चलने वाले चौड़े राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना पर काम शुरू होने के बाद हिन्दू समुदाय के पवित्र तीर्थस्थलों को रेललिंक से जोड़ने के लिये आज अंतिम रेलवे सर्वेक्षण का शुभारंभ हो गया।

रेल मंत्री सुरेश प्रभु और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज दोपहर बदरीनाथ में आयोजित एक समारोेह में अंतिम स्थान के चयन के लिये सर्वेक्षण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री राधा मोहन सिंह और उत्तराखंड के कृषि मंत्री सुरेन्द्र उनियाल, बदरीनाथ क्षेत्र के विधायक महेन्द्र भट्ट तथा अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।

इस मौके पर श्री प्रभु ने कहा आदि शंकराचार्य और पांडव भी बदरीनाथ धाम यात्रा पर आये थे लेकिन उस समय बहुत विषम परिस्थिति थी। वर्तमान में नयी तकनीक के जरिये देश की जनता की यात्रा को सुगम बनाने के लिए इन चारों धाम को रेल से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा सर्वेक्षण को कार्य एक साल में पूरा हो जायेगा। उन्होंने कहा कि चारधाम को रेल के जोड़ने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे। चार धाम को रेललिंक से जोड़ने की पूरी योजना पर 43 हजार 292 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इस परियोजना के तहत रेल लाइन बिछाने के अलावा भूस्खलन एवं पर्यावरण बचाव पर भी काम किया जायेगा। बदरीनाथ एवं केदारनाथ में यात्री आरक्षण केन्द्र भी खोले जायेंगे।

मुख्यमंत्री श्री रावत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि 12 महीने हर मौसम के अनुकूल सड़क के बाद प्रधानमंत्री ने चार धाम को रेल से जोड़ने की जो पहल की है उससे राज्य के जनता को रोजगार मिलने के साथ साथ नये पर्यटक स्थल भी भारत के मानचित्र में नजर आयेंगे। इस अवसर पर संवाददाताओं से बातचीत में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री सिंह ने बताया कि चमोली जिले में कोटी जोशीमठ में कृषि विज्ञान केन्द्र खोला जायेगा।

इससे पहले केन्द्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्री एवं अन्य सभी गणमान्य लोगों ने बदरीनाथ मंदिर में भगवान के दर्शन किये। इस लाइन का अभियांत्रिकी सर्वेक्षण किया जा चुका है जिसके अनुसार चार धाम रेल लिंक परियोजना के लिये कुल 327 किलोमीटर की लाइन बिछाई जायेगी जिसमें से 279 किलोमीटर की लाइन 61 सुरंगों से होकर गुजरेगी। इस परियोजना में कुल 59 पुल और कुल 21 स्टेशन बनाये जायेंगे। वर्ष 2017-18 के बजट में 120.92 करोड़ रुपये का प्रावधान इस सर्वेक्षण के लिये किया है।

रेल मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को उत्‍तराखंड में चार धाम -गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ की यात्रा के लिए रेल संपर्क सुनिश्चित करने हेतु आखिरी स्‍थान सर्वेक्षण करने की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है। यह रेल लाइन विशाल हिमालय के दुर्गम पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरेगी इसलिए रेल निर्माण की बड़ी चुनौती का सामना रेलवे को करना पड़ेगा। इन चारों धामों की ऊंचाई औसत समुद्री स्‍तर से भिन्‍न–भिन्‍न है और इनका आध्‍यात्मिक महत्‍व भी अनूठा है।

यमुना नदी के उद्गम से जुड़ी यमुनोत्री समुद्र तल (एमएसएल) से 3293 मीटर ऊपर है, जबकि गंगा नदी के उद्गम से जुड़ी गंगोत्री समुद्र तल से 3408 मीटर ऊपर है। भगवान शिव के तीर्थ स्‍थान वाला केदारनाथ समुद्र तल से 3853 मीटर ऊपर है, जबकि भगवान विष्‍णु के तीर्थ स्‍थान वाला बदरीनाथ समुद्र तल से 3133 मीटर ऊपर है। प्रस्‍तावित चार धाम कनेक्टिविटी से निकटतम रेलवे स्‍टेशन दोईवाला, ऋषिकेश और कर्णप्रयाग हैं, जो औसत समुद्री स्‍तर से 400-825 मीटर ऊपर हैं।

एमएसएल से 2000 मीटर एवं उससे भी ज्‍यादा ऊंचाई को प्रस्‍तावित चारधाम रेल लाइन के जरिए जोड़ना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। गंगोत्री के लिये दोईवाला से 131 किलोमीटर लाइन वाया उत्तरकाशी, मनेरी तक बिछायी जायेगी। यमुनोत्री के लिये उत्तरकाशी से 22 किलोमीटर पालर तक का लिंक तैयार किया जायेगा। केदारनाथ के लिये कर्णप्रयाग से 99 किलोमीटर का लिंक सोनप्रयाग तक बनाया जायेगा। बदरीनाथ के लिये कर्णप्रयाग-सोनप्रयाग लिंक पर साईकोट से जोशीमठ तक 75 किलोमीटर तक रेलवे लाइन बिछायी जायेगी।

उत्तराखंड के ये चार धाम, हिंदुआें की अास्था के प्रमुख आधार है। देश भर से बड़ी संख्‍या में तीर्थ यात्री चार धाम जाते हैं जबकि विदेशी एवं घरेलू पर्यटक दर्शनीय स्‍थलों को देखने के साथ-साथ ट्रेकिंग के लिए उत्‍तराखंड जाते हैं। रेलवे ने इस चार धाम रेल संपर्क परियोजना के जरिए पर्यटकों को सुरक्षित एवं आरामदेह यात्रा सुलभ कराने का निश्चय किया है। रेल विकास निगम लिमिटेड के जरिए भारतीय रेल ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच नई रेल लाइन बिछाने की महत्‍वाकांक्षी योजना पर फिलहाल काम कर रही है।

Related Posts: