नवभारत न्यूज उज्जैन

अपनों के बिछडऩे का गम रिश्तेदार और परिवारों को जितना रूला रहा था उतना ही चार अर्थियां देख लोगों की आंखों में भी आंसू आ गए। महाकाल सिंधी कालोनी और गोवर्धनधाम में माहोल काफी गमगीन था। समाज अपना कारोबार बंद कर रामेश्वरम से कन्याकुमारी जाते वक्त हादसे का शिकार हुए चार लोगों को अंतिम बिदाई देने पहुंचे थे।

मंगलवार-बुधवार रात रामेश्वरम से कन्याकुमारी जाते समय मदुराई ब्रिज पर निजी वाहन के खाई में गिरने से उज्जैन में रहने वाले सिंधी समाज के चार लोगों सहित इंदौर के दो रिश्तेदारों की मौत हो गई थी।

बुधवार सुबह उज्जैन के परिवार में शामिल महाकाल सिंधी कालोनी में रहने वाले टीकमदास सामतानी और उनके भाई लालचंद सामतानी सहित गोवर्धनधाम में रहने वाले रमेश पोहानी और उनकी भाभी विद्यादेवी पोहानी की मौत होने की खबर उज्जैन पहुंची उस वक्त से ही माहोल गमगीन हो गया था।

शुक्रवार सुबह जिला अस्पताल से चारों के शव सुभाषनगर स्थित प्रेम प्रकाश आश्रम लाए गए तो समाज जनों की भीड़ जुड़ गई। आश्रम से दोनों परिवारों के निवास स्थान पर शव ले जाए गए जिसके बाद उनकी अंतिम यात्रा एक साथ निकाली गई। जैसे ही समाज जनों ने अर्थी को कांधा लिया अपनों से बिछडऩे का गम परिवार और रिश्तेदारों में दिखाई देने लगा।

हर कोई बिलख रहा था और अपनों को याद कर रहा था। क्षेत्र की गलियों में पैर रखने की जगह नहीं थी, मकानों की छत पर अंतिम दर्शन के साथ बिदाई देने वालों का सैलाब दिखाई दे रहा था। जैसे-जैसे मृतकों के निवास स्थान से अंतिम यात्रा आगे बढ़ी वैसे-वैसे लोगों की आंखें नम होती चली गईं।

हर कोई भगवान की मर्जी को सबसे ऊपर मानकर अर्थियों को कांधा देने में अपने कदम बढ़ा रहा था। चारों अर्थियां सिंधी कालोनी चौराहे पर आई तो श्रद्धांजलि देने के लिए लोग उमड़ पड़े। तीन बत्ती चौराहा तक आलम यह था कि मार्ग के दोनों ओर लोगों की भीड़ जुटी हुई थी, यातायात भी पूरी तरह से थम गया था।

सडक़ों से गुजरने वाले लोग एक साथ 4 अर्थियां देख कुछ देर के लिए रूके और शीश झुकाकर श्रद्धांजलि दी। प्रशासन ने भी एक साथ निकली चार लोगों की अंतिम यात्रा को लेकर यातायात व्यवस्था की कमान पूरी तरह से संभाल रखी थी। शिप्रा तट किनारे चक्रतीर्थ पर जैसे ही शवयात्रा पहुंची वहां भी लोग अंतिम बिदाई देने के लिए उमड़ पड़े।

बहनों का रो-रो कर बुरा हाल

महाकाल सिंधी कालोनी में रहने वाले ज्यूस कारोबारी दो भाईयों की अर्थियां जैसे ही समाज जनों ने कांधे पर उठायी उनकी बहनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। उनके भाई हमेशा के लिए उनसे अंतिम बिदाई ले रहे थे, बहनें अपने भाईयों के बिछडऩे के गम में खुद को नहीं संभाल पा रही थीं।

भतीजा लक्ष्मण सामतानी उन्हें सम्भालने की कोशिश करता रहा लेकिन जब तक क्षेत्र से शवयात्रा बाहर नहीं चली गई बहनों का विलाप बंद नहीं हुआ। भाईयों के बिछडऩे का गम बहनों को जिंदगीभर उनकी याद दिलाता रहेगा।

विदेश से आया पुत्र

महाकाल सिंधी कालोनी में रहने वाले लालचंद सामतानी और उनके छोटे भाई टीकमदास की शवयात्रा निकलने से पहले उनके पुत्र लेखराज और भरत समतानी उज्जैन पहुंच गए थे। दोनों स्पेन में रहकर खुद का व्यवसाय करते हैं। अपने पिताओं की दुखद मौत की खबर पाकर दोनों पूरे परिवार के साथ शुक्रवार सुबह उज्जैन पहुंचे थे।

समाज जनों ने बंद रखा कारोबार

सिंधी समाज के दो परिवारों में शामिल 4 लोगों की धार्मिक यात्रा के दौरान हादसे में हुई मौत के बाद पूरे समाज ने शुक्रवार को अपना कारोबार बंद रखा। घरों में भी गम का माहौल बना हुआ था। समाज का हर व्यक्ति अंतिम बिदाई देने के लिए प्रेम प्रकाश आश्रम पहुंच गया था।

समाज से जुड़े टावर चौपाटी पर व्यवसाय करने वाले व्यापारियों ने गुरूवार शाम से ही अपना कारोबार बंद कर दिया था। रात 9 बजे जैसे ही चारों शव उज्जैन पहुंचे तो लोग जिला अस्पताल में जमा हो गए थे।

रातभर अस्पताल में रखे शव

तमिलनाडु से चारों शवों को विमान में रखकर इंदौर लाया गया था जहां से निजी वाहन के द्वारा चारों शव उज्जैन लाए गए। रात का समय होने पर समाज के वरिष्ठ पूर्व विधायक शिवा कोटवानी ने जिला अस्पताल प्रशासन से शवों को पोस्टमार्टम कक्ष में रखने की अनुमति मांगी।

अस्पताल प्रशासन ने जिसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली थीं। फ्रिजर में शवों को रखा जाना था लेकिन तमिलनाडु से ताबुत में आए शव फ्रिजर में नहीं रखे जा सके जिन्हें रातभर पोस्टमार्टम कक्ष में ही रखा गया।

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