नयी दिल्ली,  रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने आज उम्मीद जतायी कि रेलवे की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिये उठाये गये कदमों का ज़मीनी असर साढ़े तीन से चार साल में दिखने लगेगा और तब रेलवे की सेवाओं में गुणात्मक सुधार आने के साथ साथ बैलेंस शीट भी दुरुस्त हो जायेगी।

श्री प्रभु ने यहां भारतीय उद्योग परिसंघ के वार्षिक सम्मेलन में एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि रेलवे की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिये पारंपरिक परिचालन में सुधार लाने के साथ साथ दो मोर्चाें पर तेज़ी से काम करने की जरूरत है।

पहला- लागत में कमी लाना और दूसरा गैर किराया-भाड़ा राजस्व बढ़ाना। उन्होंने कहा कि रेलवे ने ऊर्जा खर्च में कमी लाने की योजना बनायी है। ऊर्जा क्षेत्र में दस साल में 41 हज़ार करोड़ रुपये की बचत का अनुमान है। रेलवे की सामग्री खरीद एवं आपूर्ति की प्रणाली का डिजीटलीकरण किया गया है। इससे बहुत खर्च बच रहा है। उन्होंने कहा कि गैर किराया भाड़ा राजस्व को बढ़ाने के लिये जो उपाय किये जा रहे हैं उनका असर दो तीन साल में सामने आना शुरू हो जायेगा।

रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के अलावा रेलवे के परिसरों, स्टेशनों एवं ट्रेनों में विज्ञापन तथा लोगों की निजता को सुरक्षित रखते हुए डाटा के मौद्रीकरण के माध्यम से रेलवे बहुत ज़्यादा आमदनी कर सकती है। इस दिशा में कदम उठाये जा रहे है। करीब दो लाख टीवीस्क्रीन लगाये जा रहे हैं। रेडियाे भी शुरु होगा।

उन्होंने कहा कि रेलवे के पास विश्व की कुल आबादी के बराबर यात्री आते हैं लिहाजा अगर केवल रेलवे को विज्ञापन मिलें तो कल्पना की जा सकती है कि इससे कितना प्रचार मिलेगा। उन्हाेंने कहा कि रेलवे की क्षमता विस्तार योजनायें भी तीन साल में पूरी जायेंगी जिससे ज़्यादा गाड़ियां चलाने की जगह मिलेगी। इससे गति एवं समयबद्धता में सुधार आयेगा।

इससे टाइम टेबल वाली मालगाड़ियां चलेंगी। पूर्वी एवं पश्चिमी समर्पित मालवहन गलियारे चालू होने से रेलवे मालवहन के क्षेत्र में पुराने मुकाम को पुन: हासिल कर पायेगी। इसके साथ रेलवे ने लेखांकन सुधार भी शुरू किये हैं। अभी पश्चिम मध्य रेलवे के अजमेर मंडल में इसे सर्वप्रथम लागू किया गया है।

रेल मंत्री ने गैर किराया भाड़ा राजस्व को आय का बहुत ही अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि जापान रेलवे इस मद में 25 प्रतिशत से अधिक आय अर्जित करती है। अन्य देशों में भी रेलवे की आमदनी का बड़ा हिस्सा गैर किराया भाड़ा राजस्व का है। भारतीय रेल भी गैर किराया भाड़ा राजस्व को 30 प्रतिशत तक लाने में कामयाब रहेगी। पूरी उम्मीद है कि करीब साढ़े तीन या चार साल में रेलवे की बैलेंस शीट एकदम दुरुस्त हो जायेगी।

ट्विटर यात्रियों को वक्त पर मदद मुहैया कराने की पहल के बारे में चर्चा में उन्होंने कहा कि यह एकदम नया प्रयोग है और इससे जो परिणाम हासिल हुए हैं। उससे सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं को रेलवे के प्रदर्शन सुधार से जोड़ा गया है। इसे भी प्रबंधकीय सूचना तंत्र (एमआईएस) का हिस्सा बनाया गया है।

रेलवे की निर्णय प्रक्रिया के विकेन्द्रीकरण के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि पहले महाप्रबंधक सारे निर्णय बोर्ड पर छोड़ कर निश्चिंतता से रहते थे लेकिन अब उन्हें चिंता रहने लगी है। अब उन्हीं में से कई महाप्रबंधक बहुत अच्छे निर्णय ले रहे हैं। बाकी उनसे सीख रहे हैं।

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