इन्दौर,   निर्यातकों के साथ ही स्टॉकिस्टों द्वारा भी लिवाली से हाथ खींचे रखने से चावल की कीमतों में जिस प्रकार से तेजी का रूख है और आगे भी सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। यद्यपि चालू सप्ताह के दौरान यहां पर चावल 1121 की कीमतों में 100 रूपये तक का सुधार भी हुआ ।

धान की आवक पहले की अपेक्षाकृत और कमजोर बताई जा रही है, जिससे कुछ मंडियों में धान की कीमतों में भी कुछ सुधारात्मक रूख बताया गया था। दूसरी तरफ बासमती चावल के निर्यात को देखें तो आंकडों के मुताबिक दिसम्बर में बासमती चावल के निर्यात में बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। इसके अलावा अरब देशो से भी कुछ मांग बताई जाने लगी है। दिसम्बर में देश से बासमती चावल के निर्यात में बढ़ोत्तरी दर्जकुछ समय से निर्यातकों के साथ ही स्टॉकिस्टों की मांग कमजोरदिसम्बर में देश से बासमती चावल के निर्यात में बढ़ोत्तरी दर्जकुछ समय से निर्यातकों के साथ ही स्टॉकिस्टों की मांग कमजोर है.

हालांकि देश की अधिकांश मंडियों में पिछले कुछ समय से निर्यातकों के साथ ही स्टॉकिस्टों की मांग कमजोर होने से चावल की कीमतों में नीरस रूख बना हुआ है, लेकिन यदि इसके निर्यात पर नजर डालें तो आंकडों के मुताबिक दिसम्बर में देश से बासमती चावल के निर्यात में बढ़ोत्तरी दर्ज हई है।

एपीडा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दिसंबर के दौरान देश से 3ए78,732 टन बासमती चावल का निर्यात हुआ है, जो नवंबर में हुए निर्यात के मुकाबले करीब 26 फीसदी ज्यादा है। नवंबर के दौरान देश से सिर्फ 3,01,850 टन बासमती चावल का निर्यात हो पाया था। दरअसल दिसंबर के दौरान ईरान की खरीद बढ़ी है जिस वजह से बासमती निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिसंबर 2014 के दौरान भी देश से 3,76,679 टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था।

यदि मंडियों के हाजिर भावों पर नजर डालें तो दिसम्बर के दूसरे पखवाड़े के बाद से निर्यातकों के साथ ही स्टॉकिस्टों की बेरूखी से बाजार धीरे-धीरे लगातार गिरता चला गया। जनवरी के प्रारम्भ में यहां पर चावल 1121 और 1509 क्वॉलिटी का भाव क्रमश: 4050 से 4750 और 3450 से 3950 रूपये प्रति क्विंटल के आसपास बोला जा रहा था। उसके बाद मांग में लगातार कमी बनी रहने से जनवरी के मध्य तक इनके भाव लगभग शांत पड़े रहे।

इस दौरान इसमें ज्यादा उतार-चढाव नही होने से इनके भाव क्रमश: 4150 से 5475 और 3550 से 3650 रूपये प्रति क्विंटल के आसपास बने रहे। इसकी कीमतों में इस दौरान स्थिरता के पीछे निर्यातकों की मांग में भारी कमी के अलावा लोकल स्टॉकिस्टों की मांग में भी कमी को बताया जा रहा था।

पिछले माह से पहले तक उठाव अच्छा होने से बारीक चावलों के साथ ही अन्य क्वॉलिटी के चावल में तेजी का रूख बन गया था। उस समय निर्यातकों की मांग भी निचले स्तर पर निकलने से चावल में लगभग दो से ढाई माह पहले के दौरान ही 700 से 900 रूपये प्रति क्विंटल तक की तेजी आ गयी थी।

 

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