नई दिल्ली,  चीनी के उत्पादन में अप्रत्याशित कमी और निर्यात की संभावनाएं सुधरने से चीनी उद्योग बेहतरी के संकेत दिखा रहा है, जो पिछले कुछ महीने पहले गन्ने के बकाये और घटती आमदनी जैसी दिक्कतों से जूझ रहा था।
ईंधन में एथेनॉल के मिश्रण का कार्यक्रम भी रफ्तार पकड़ रहा है और गत 14 वर्षों में पहली बार देश एथेनॉल मिश्रण का आंकड़ा हासिल करने के नजदीक पहुंच गया है। पिछले साल तक औसत मिश्रण का स्तर 2.5 से 3 फीसदी था।

सभी चीनी मिलों ने इस साल इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम को 120 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति करने पर सहमति जताई है। पांच फीसदी एथेनॉल मिश्रण के लिए 130 करोड़ लीटर एथेनॉल की जरूरत है। पिछले साल मिलों ने 66 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की थी।

न्यूयॉर्क में कच्ची चीनी का वायदा इस साल के लिए पांच फीसदी बढ़ा है, जिसमें 2010 के बाद पहली सालाना बढ़त दर्ज की गई है। ब्लूमबर्ग द्वारा 18 कारोबारियों पर किए गए सर्वे में कहा गया है कि वर्ष 2016 की पहली तिमाही के दौरान कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहेगी। इससे भारतीय चीनी मिलों के लिए संभावनाएं सुधरेंगी। ज्यादातर प्रमुख चीनी कंपनियों के शेयरों में अक्टूबर से बढ़त जारी है। बजाज हिंदुस्तान का शेयर 1 अक्टूबर से अब तक 34 फीसदी चढ़ चुका है। वहीं त्रिवेणी इंजीनियरिंग और धामपुर शुगर्स के शेयरों में क्रमश: 86 फीसदी और 122 फीसदी तेजी दर्ज की गई है।

चीनी मिलों को 4.5 रुपये प्रति क्विंटल का प्रोत्साहन हासिल करने के लिए 32 लाख टन चीनी का निर्यात करना होगा, जिसमें से 8 लाख टन के लिए अनुबंध हो चुके हैं और 3 लाख टन का निर्यात हो चुका है। भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) के अध्यक्ष एम वेल्यायन ने इस उद्योग के एक सम्मेलन में कहा कि भारत 12 लाख टन सफेद चीनी और 20 लाख टन कच्ची चीनी का निर्यात कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो अक्टूबर में शुरू होने वाले सीजन 2016-17 में बचा हुआ स्टॉक 67 लाख टन होगा, जो वर्तमान वर्ष की तुलना में 26.4 लाख टन कम है।

 

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