खास बातें

  • हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत अग्रणी महाशक्ति-अमेरिका
  • अफगानिस्तान में पाकिस्तान को सकारात्मक भूमिका की सीख भी दी
  • 5 लाख भारतीयों को मिलेगा ग्रीनकार्ड
  • अमेरिका प्रवासियों का देश है और वह इस बुनियादी पहचान को नहीं बदलेगा

नई दिल्ली,

अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर ने भारत को अमेरिकी कारोबारों के लिए ऑलटर नेटिव इन्वेस्टमेंट हब बताते हुए गुरुवार को कहा कि अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत को अग्रणी महाशक्ति के रूप में देखता है.

राजदूत के तौर पर कामकाज संभालने के बाद अपने पहले नीतिगत भाषण में जस्टर ने भारत के लिए ट्रंप प्रशासन के अजेंडे को रखा. अमेरिकी राजदूत जस्टर ने कहा कि कई अमेरिकी कंपनियों ने चीन में कारोबार करने में बढ़ती मुश्किलों की बात की है. उस हिसाब से कुछ कंपनियां वहां अपने कामकाज को कम कर रही हैं, वहीं अन्य कई कंपनियां बड़ी दिलचस्पी से वैकल्पिक बाजारों की ओर देख रही हैं.

ऐसे में भारत एक अच्छा वैकल्पिक निवेश हब बन सकता है. उन्होंने कहा, भारत व्यापार और निवेश के जरिए रणनीतिक अवसर का लाभ उठा सकता है और भारत-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी कारोबार के लिए वैकल्पिक हब बन सकता है.

जस्टर ने कहा कि ट्रंप का चुनावी नारा अमेरिका फर्स्ट और भारत सरकार की फ्लैगशिप योजना मेक इन इंडिया असंगत नहीं हैं. जस्टर ने कहा, मैं इस बात को और आगे बढ़ाते हुए यह सुझाव देना चाहता हूं कि हमें आर्थिक संबंधों पर भी वैसा ही रणनीतिक लेंस लगाने की जरूरत है, जैसा कि अभी रक्षा संबंधों के साथ हुआ. उन्होंने कहा, अभी भारत चार बहुस्तरीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं में से दो में सदस्यता का लाभ उठा रहा है.

एनएसजी में भारत के प्रवेश के लिए अमेरिका की कोशिशें जारी

जस्टर ने गुरुवार को कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत एक बड़ी ताकत है. हम अपने सहयोगियों के साथ भारत को एनएसजी में प्रवेश दिलाने के मुद्दे पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और इसके इतर भी नई दिल्ली एक बड़ी ताकत है.

यह इलाका अमेरिका और भारत के लोगों की सुरक्षा और समृध्दि के लिए बेहद अहम है. हम साथ मिलकर इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं, जहां कानून का राज हो और लोकतांत्रिक सिद्धांत दिखाई पड़े. जस्टर ने साथ ही अफगानिस्तान में पाकिस्तान को सकारात्मक भूमिका की सीख भी दे डाली.

5 लाख भारतीयों को मिलेंगे ग्रीन कार्ड!

अमेरिकी संसद में एक महत्वपूर्ण बिल पेश किया गया है, जिससे भारतीय पेशेवरों को लाभ होगा. दरअसल, इस बिल में मेरिट के आधार पर इमिग्रेशन सिस्टम पर जोर देते हुए सालाना दिए जाने वाले ग्रीन कार्ड्स को 45 प्रतिशत बढ़ाने की मांग की गई है.

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पेश इस बिल पर मुहर लगते ही करीब 5 लाख भारतीयों को फायदा होगा, जो ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं. कांग्रेस से पारित होने और राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा.

इससे डायवर्सिटी वीजा प्रोग्राम समाप्त हो जाएगा और एक साल में कुल इमिग्रेशन का आंकड़ा भी मौजूदा 10.5 लाख से घटकर 2.60 लाख रह जाएगा. इस बिल में ग्रीन कार्ड्स जारी किए जाने की मौजूदा सीमा को 1.20 लाख से 45 फीसदी बढ़ाकर 1.75 लाख सालाना करने की मांग की गई है.

एच1बी वीजा होल्डरों की शंकाओं को किया खारिज

अमेरिका में रह रहे करीब साढ़े 7 लाख भारतीय एच1बी वीजाधारकों के भारत लौटाए जाने की आशंकाओं के बीच अमेरिका ने गुरुवार को भारत की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की.

भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर ने कहा कि अमेरिका प्रवासियों का देश है और वह इस बुनियादी पहचान को नहीं बदलेगा. जस्टर ने यह भी कहा कि भारत हिंद महासागर और आसपास के क्षेत्रों में शांति के खतरे का जवाब देने में सक्षम है और अमेरिका क्षेत्र की सुरक्षा में भारत की भूमिका का समर्थन करता रहेगा.

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