चौतरफा खुशहाली हो!

प्रफुल्ल माहेश्वरी

समय की शिला पर अनेकानेक कथानक अंकित होते हैं. कुछ मिटते जाते हैं. कुछ हमेशा के लिए याद रहते हैं. कुछ सबक के तौर पर प्रस्तुत किए जाते हैं तो कुछ आगामी समय में कुछ और नया करने की प्रेरणा देते जाते हैं. केवल व्यक्ति ही नहीं- समाज और राष्ट्र के लिए भी समय सबसे बड़ा शिक्षक होता है.

प्रकृति का नियम है- सूर्योदय के पूर्व ही तम को समाप्त करने की पहल आसमान में छाने वाली लालिमा करने लगती है. 2017 की विदाई बेला और सन् 2018 की लालिमा सारी दुनिया विशेषकर हमारे भारत में नवीन उत्साह, आत्मविश्वास, विकास, गति, आपसी भाईचारा, प्रगति, शक्ति सम्पन्नता, दूरदृष्टि, दृढ़-निश्चय और नई सोच का संचार करे. व्यवस्था, समाज की सहभागिता के साथ मिलकर ऐसा प्रयास करे कि भारत के समाज के अंतिम व्यक्ति और किसान के घर-आंगन में नए वर्ष में चौतरफा खुशहाली का वास हो!

बीते सन् 2017 का सिंहावलोकन करने से यह प्रतीत होता है कि यह वर्ष काफी उथल-पुथल वाला रहा है. वैश्विक दृष्टि से भी उत्तरी कोरिया और अमेरिका के मर्यादा से बाहर होने वाले संवाद हों या भारत के अपने पड़ोसी राष्ट्रों पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा और सीमा पार की तनातनी की घटनाएं, इन्होंने कई तरह के संकेत दिए.

बांगलादेश, नेपाल और श्रीलंका के साथ भी अनेक मुद्दे उठे. इस बात की सराहना की जानी चाहिए कि भारत ने अपनी मजबूत भूमिका की परंपरा को कायम रखा है. नए वर्ष में हमें सामरिक दृष्टिï से और मजबूत होना है ताकि सदा की भांति हमारे पड़ोसी देश भारत का लोहा मानते रहें. सीमा पार से होने वाली सैनिक गतिविधियां और आतंकी घुसपैठ से भी हमें और सतर्क रहना है.

भारत प्रगति की ओर बढ़ रहा है. दुनिया हमारी ओर उम्मीद और विश्वास के साथ देख रही है. भारत में सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का और विकास हो- ऐसे प्रयास निरन्तर करना होंगे. समाज के सभी वर्गों की भागीदारी इसमें जरूरी है. तीन तलाक के मुद्दे पर भी हमें नवीन सोच के साथ आगे आना होगा.

अभी हाल ही में देश ने गुजरात और हिमाचल के चुनाव देखे हैं. वक्त की इसे विडम्बना ही कहा जाएगा कि ये चुनाव जनता के हितों से जुड़े मुद्दों से भटककर निचले स्तर पर पहुंच गये थे. नए वर्ष में मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों के चुनाव हैं. इसके अगले वर्ष फिर आम चुनाव हैं.

हमें यह ध्यान रखना है कि चुनाव के मुद्दे आर्थिक और सामाजिक विकास से जुड़े विषयों के आसपास रहें. दोनों बड़े राजनैतिक दलों को इसी चिंतन के साथ मैदान में आना चाहिए. भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए अनेक मुद्दों पर इन दलों में आपसी सहमति बनना चाहिए.

मध्यप्रदेश के लिए भी आने वाला साल अनेक चुनौतियों से भरा होगा. बीते साल में किसानों से जुड़ी समस्याओं ने राज्य को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला खड़ा किया. किसान आंदोलन ने सत्ता और व्यवस्था को हिलाकर रख दिया था. यह नहीं भूलना चाहिए कि मध्यप्रदेश में यदि किसान खुश हैं तो सब खुश हैैं!

किसानों की बेहतरी के लिए शुरु भावान्तर योजना की इस दृष्टि से पुनर्समीक्षा करना चाहिए कि वास्तव में असली लाभान्वित किसान हैं या कोई और! नकली खाद, नकली बीज और कीटनाशक से जुड़ी किसानों की समस्याओं का भी तुरन्त समाधान होना चाहिए. जी.एस.टी. ने व्यापारियों को जो दर्द दिया है- उसकी क्षतिपूर्ति भी होना चाहिए.

इन जैसी अनेक समस्याओं से पार पाते हुए हम ऐसे प्रयास नये वर्ष में संकल्प लेकर करें कि समाज का हर वर्ग- खास तौर पर अंतिम व्यक्ति भी विकास, प्रगति, बेहतर स्वास्थ्य, सुनहरे सपनों और उनके पूरा होने, समृद्धि, आपसी प्रेम और सद्भाव की उस लालिमा और प्रकाश से आलोकित हो जिसे नए साल के सबेरे में सारी दुनिया नमन करेगी. नया वर्ष आप सभी के लिए खुशहाली लाए. सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं!!!

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