नई दिल्ली. वल्र्ड गोल्ड काउंसिल की पूरे वर्ष की ताजा गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स रिपोर्ट के अनुसार 2014 के दौरान स्वर्ण बाजार में स्थिरता देखने को मिली और यह 2013 की अत्यधिक ऊंचाईयों से वापस आने में सफल रहा. सोने की वार्षिक मांग 2013 की तुलना में 4 प्रतिशत घटकर 3,924 टन रही. साल की समाप्ति मजबूती के साथ हुई और 2014 की चौथी तिमाही में सोने की मांग आभूषण और सेंट्रल बैंक की लेवाली से निकली मांग के कारण वार्षिक आधार पर 6 प्रतिशत बढ़कर 987 टन पहुंच गई.

सोने की मांग के लिए आभूषण सबसे प्रमुख घटक बने हुये हैं. बीते वर्ष की तुलना में 2014 में आभूषण की कुल मांग 10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2,153 टन रही. भारत जोकि दुनिया के दो सबसे बड़े स्वर्ण बाजारों में शामिल हैं, के लिए वल्र्ड गोल्ड काउंसिल द्वारा 1995 से एकत्र किये जा रहे आभूषणों की मांग के आंकड़ों के लिहाज से यह अब तक का सर्वाधिक मजबूत वर्ष रहा और यह मांग वर्ष दर वर्ष 8 प्रतिशत बढ़कर 662 टन पर पहुंच गई. इसे अधिकांश वर्ष सोने के आयात पर सरकारी पाबंदी के बावजूद शादियों एवं त्योहारों के दौरान की गई खरीदारी का सहयोग मिला. भले ही, चीन में आभूषणों की मांग में 33 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. लेकिन यह अभी भी आभूषणों की मांग के लिए दूसरा सबसे अच्छा वर्ष रहा है.

निवेश मांग स्वर्ण बाजार का एक और प्रमुख संचालक रहा. 2014 में निवेश मांग 2 प्रतिशत बढ़कर 905 टन पहुंच गई जबकि 2013 में यह आंकड़ा 885 टन था. बार एवं सिक्कों में कुल निवेश में 40 प्रतिशत की नरमी आई, क्योंकि जिन निवेशकों से 2013 में बड़ी खरीदारी की थी, उन्होंने 2014 में लेवाली से किनारा किया. 2014 में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) निकासी गत वर्ष के 880 टन की तुलना में गिरकर 159 टन पर आ गई.

सेंट्रल बैंक ने 2014 में भी सोने के मूल्य को आरक्षित संपदा के रूप में देखना जारी रखा. 2014 के दौरान सेंट्रल बैंक ने 477 टन सोना खरीदा, 2013 की तुलना में इसमें 17 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई. 2014 की अंतिम तिमाही में सोने की मांग वर्ष दर वर्ष 40 प्रतिशत बढ़कर 119 टन पहुंच गई. यह लगातार पांचवा वर्ष और 16वीं तिमाही है जब सेंट्रल बैंक सोने का शुद्ध खरीदार रहे.

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