भारत की राजनीति में इस समय जनता पार्टी परिवार के खन्ड-खन्ड हो गये. 6 दलों ने पुन: एक होकर एक ही पार्टी- समाजवादी जनता पार्टी नाम की एक नयी या एकीकृत पार्टी का गठन किया है. श्री जयप्रकाश नारायण ने आपातकाल के बाद 1977 में देश के कांग्रेस विरुद्ध सभी दलों को एकीकृत करके न सिर्फ जनता पार्टी बनाई बल्कि उनके बनने के चंद महीनों के अंदर उसे देश में प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र और राज्यों में सत्ता में बिठाल दिया. लेकिन श्री जयप्रकाश नारायण स्वयं सत्ता से दूर रहे.

सन् 1980 में उनकी मृत्यु के बाद जनता पार्टी में इतनी अंदरुनी कलह हुई कि वह पार्टी छिन्न भिन्न होकर केंद्र व राज्यों में महज तीन साल में सत्ता से बाहर हो गयी. जनता पार्टी के मुख्य आधार समाजवादी पार्टियां और भारतीय जनसंघ थे. पार्टी बिखराव में भारतीय जनसंघ बाहर आकर नये नाम भारतीय जनता पार्टी के नाम से पुन: गठित हुआ और आज तक उसी रूप में कायम है. लेकिन समाजवादी आधार की पार्टियां लगातार और विभाजित हो गयी और समयकाल में उनकी 6 पार्टियां हो गयी. यही 6 पार्टियां इस समय भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती शक्ति व प्रभाव से संत्रस्त होकर पुन: एक पार्टी का रूप समाजवादी जनता पार्टी का रूप ले लिया है. इसमें सबसे बड़ी शक्ति की पार्टी उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी और बिहार में नीतेश कुमार की जनता दल यूनाईटेड है, जो इन राज्यों में सत्ता में है. इसके अलावा इसमें शामिल लालू यादव की राष्टï्रीय जनता दल बिहार, झारखंड, देवेगौड़ा की जनता दल सेक्यूलर कर्नाटक में और चौटाला परिवार की इंडियन नेशनल लोकदल हरियाणा में कुछ प्रभावी है. लेकिन लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता की रोड रोलर विजय ने वहां की सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी व उसके सुप्रीमो श्री मुलायम सिंह यादव के सामने अस्तित्व का संकट पैदा कर दिया. बिहार में मुख्यमंत्री श्री नीतेश कुमार को अगले साल 2016 में सबसे बड़ा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी से ही मिलेगा- जो कुछ समय पहले तक नीतेश की जदयू भाजपा में साझा सरकार थी और अब उतनी ही कटुता आ गयी है.
इन दोनों पार्टियों समाजवादी पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के मुलायम सिंह व श्री नीतेश की पहल यह बिखरे हुए जनता परिवार की अन्य पार्टियां जो प्रभावहीन हो चुकी है. वे सब अपने अस्तित्व को बचाने के लिये एक पार्टी बन गये हैं. इनमें भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर की जनता दल समाजवादी पार्टी भी है जो लगभग अस्तित्वहीन है. यह उसी तरह अस्तित्व में रही जैसे भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित होने वाले श्री सुब्रमण्यिम स्वामी अकेले जनता पार्टी चलाते रहे और अब भाजपा में पुन: चले गये हैं.

समाजवादी आंदोलन के एक चोटी के नेता स्वर्गीय प्रोफेसर मधु दंडवते ने समाजवादी जनता पार्टी के आत्म विवेचन में कहा था कि- समाजवादी (जनता) परिवार के लोग अभिशप्त है. ये दो साल से ज्यादा साथ नहीं रह सकते और तीन साल से ज्यादा अलग नहीं रह सकते हैं. अब यही देखना है समाजवादी जनता परिवार का विकरण…. कितने दिन टिक पाता है क्या यह शाप मुक्त हो गये हैं- समय बतायेगा.

इस नये दल के पास इनके आपस में मिलाकर लोकसभा में कुल 15 सांसद, राज्यसभा में 30 सांसद और राज्यों में इनके कुल 424 विधायक हैं. राजनैतिक हैसियत से यह इस समय प्रथम भारतीय जनता पार्टी, द्वितीय कांग्रेस के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी
पार्टी है.

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