climateनयी दिल्ली,  मोरकक्को में सात से 18 नवंबर तक होने वाली जलवायु वार्ता (कोप 22) में भारत पेरिस जलवायु संधि के लक्ष्यों की दिशा में की जा रही तैयारियों के तहत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और वित्तीय सहयोग के साथ ही गांधीवादी जीवन शैली अपनाने पर खास जोर देगा।

केन्द्रीय वन एंव पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने आज कहा कि भारत ने पेरिस जलवायु समझौते को मंजूरी देकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। यूराेपीय संघ ने भी आज इसे मंजूरी दे दी । यह समझौता 2020 के बाद लागू होना है लेकिन उसके पहले 2016 से 2020 के बीच सभी देशेां को मिलकर इसके लिए एक प्रभावी कार्ययोजना का खाका तैयार करना होगा।

यह काम माेरक्को सम्मेलन में किया जाएगा जहां भारत विकसित देशों पर इस दिशा में ज्यादा गंभीर प्रयास करने के लिए दबाव बनाएगा। श्री दवे ने कहा कि सम्मेलन में भारत समझौते को लागू कराने के लिए संसाधन जुटाने पर विशेष जोर देगा जिसके तहत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता विकास के लिए मदद, 100 अरब डॉलर के हरित कोष के लिए पर्याप्त धन की व्यवस्था के साथ ही सतत जीवन शैली और जलवायु न्याय के मुद्दे भी जुड़े होंगे।

सम्मेलन में भारत की आेर से जलवायु न्याय पर एक संगाेष्ठि का भी आयेाजन किया जाएगा जिसका मुख्य उद्देश्य विश्व समुदाय को यह संदेश देना होगा कि हम चाहे कितने सम्मेलन और सेमिनार कर लें जबतक प्राकृतिक संसाधनों के किफायती इस्तेमाल वाली जीवन शैली नहीं अपनाएंगे तबतक पर्यावरण संरक्षण के सारे प्रयास बेमानी होंगे।

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