जाटों के हिंसक आंदोलन के सामने पहले यू.पी.ए. की केंद्रीय सरकार और राजस्थान की सरकारों ने हिंसा को चलने दिया. एक महीने से ज्यादा मुंबई सेंट्रल दिल्ली रेलवे खंड बंद रहा. उसी तारतम्य में एन.डी.ए. की केंद्रीय सरकार व हरियाणा में भाजपा की खट्टर सरकार ने हिंसा के आगे समर्पण कर देश को हमेशा के लिये अब हिंसक आंदोलन लूट, डकैती की आग में झोक दिया है. उसके दुष्परिणाम देश भर को अगर स्थाई तौर पर नहीं तो लंबे काल तक अवश्य भुगतने होंगे. अब यह मुसीबत आरक्षण तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि हर आंदोलन में होती रहेगी.

सबसे पहले इस तरह का हिसंक और विध्वन्सक आंदोलन सन् 60 के दशक में हिन्दी के विरोध में तमिलनाड में करुणानिधि ने चलाया था. लेकिन उसके बाद वह सिलसिला नहीं बना था.

प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में टिकी हुई थी. उसने आडवानी की रथयात्रा से राम मंदिर के मुद्दे पर राजनैतिक लाभ लेना चाहा. श्री वी.पी. सिंह ने मंदिर का तोड़ मंडल कमीशन की दाखिल दफ्तर हो चुकी रिपोर्ट को झाड़-पोंछकर निकाला और आरक्षण की त्रासदी अन्य पिछडॉे वर्ग के नाम पर पूरे राष्टï्र पर थोप थी. संविधान में बाबा साहब अंबेडकर केेवल जाति प्रथा के तहत अछूत माने जानी वाली और घने जंगलों में सभ्यता से दूर आदिवासियों के लिये 10 वर्ष के आरक्षण की व्यवस्था की थी. श्री सिंह ने आरक्षण को इतना विकृत कर दिया कि अब इस जाति व वर्ग को स्वयं पिछड़ा मानकर पिछड़ा वर्ग में आना और आरक्षण पाना चाहता है. इससे राजस्थान के मीणा जो वी.पी. सिंह के 27 प्रतिशत से नहीं आये थे. उन्होंने उनके लिये पिछड़ा वर्ग का दर्जा और 5 प्रतिशत आरक्षण मांगा जो कुछ आन्दोलनों के बाद मान
लिया गया.

राजस्थान के जाटों की मीणा जाति से कुछ कटुता की भावना चलती है. उन्हें इसमें ईष्र्या के तहत आरक्षण का उग्र आन्दोलन छेड़ दिया. जाट सम्पन्न किसान वर्ग है. धनवान और बलवान हैं इसलिए आन्दोलन इतना उग्र, लम्बा और हिंसक कर दिया. इससे पहले आन्दोलनों का कभी ऐसा रूप सामने नहीं आया था. जाटों का उग्र आन्दोलन हरियाणा में इतना उग्र हो गया कि पूरा रोहतक शहर आग के हवाले कर दिया और उसे लूट लिया. इस पर सरकार ने बजाय दृढ़ता दिखाने के हिंसा को समर्पण व मानकर जाटों ने जो जैसा चाहा वैसा कर दिया और उनके अल्टीमेटम पर विधानसभा में जाट आरक्षण का विधेयक आ गया.

जबकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट जाटों को पिछड़े और मुसलमानों को धर्म के आधार पर आरक्षण को रद्द कर चुका है. फिर भी जाट आरक्षण ले ही गये.
गुजरात में पाटीदार जो पटेल कहलाते हैं, सम्पन्न वर्ग है. उसने भी आरक्षण की मांग कर दी. उनका दावा यह है कि जब हरियाणा व राजस्थान में जाटों और गुर्जरों को आरक्षण दिया गया है तो गुजरात के पाटीदारों को क्यों न दिया जाए. एक अनजान व्यक्ति हार्दिक पटेल रातोंरात पटेलों का राष्ट्रीय नेता बन गया. ये भी जाटों के हिंसक विध्वंसक राह पर चल पड़े हैं. मेहसाणा, अहमदाबाद, राजकोट में हिंसक भड़क उठी है. कफ्र्यू लग गया है. इन जगहों पर मोबाइल, इन्टरनेट सेवायें बन्द हो गयी हैं. लाठी चार्ज आंसू गैस, पथराव के साथ जेल भरो आन्दोलन आग पकड़ चुका है.

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