जाट आरक्षण के मुद्दे पर जाटों, सरकारों व अदालतों के बीच कई घमासान फिर होने के आसार बन गये है जो पहले भी बन चुके थे. जाटों का आरक्षण आंदोलन जितना कानूनों व सरकारों को चुनौती देते हुए चल रहा है उसमें अब आरक्षण का आधार पिछड़ापन होना नहीं रह गया है और यह हो गया कि कौन कितनी हिंसा, उग्रता कर सकता है. इसी का असर यह भी हुआ कि गुजरात में पटेल जो पाटीदार भी कहे जाते है उसी तरह का आंदोलन करने लगे हैं. हर जाति के आंदोलन में अब नया जातीय नेता उभर के सामने आ रहा है. गुजरात में हार्दिक पटेल पाटीदारों का नेता बन गया. गुर्जर भी आंदोलन करने लगे.

आरक्षण का विकृत रूप बनाने वाले मात्र 11 महीने सरकार चलाने वाले प्रधानमंत्री रहे श्री वी.पी. सिंह हैैं. जिन्होंने संविधान में निर्धारित केवल अनुसूचित जाति व आदिवासियों के लिये आरक्षण को ‘पिछड़ा वर्गÓ का आरक्षण कर उसका प्रतिशत 27 प्रतिशत कर दिया. लेकिन बात यहां रुकी नहीं. इन 27 प्रतिशत में जो जातियां शामिल नहीं की गयी, उन्होंने यह मांग उठा दी कि वे भी पिछड़े है और उन्हें आरक्षण दिया जाए. राजस्थान में मीणा जाति की मांग मान ली गयी. इसी की प्रतिस्पर्धा में जाटों ने भी 5 प्रतिशत रिजर्वेशन मांगा. यू.पी.ए. शासन काल में जाटों ने देश के महत्वपूर्ण मुंबई सेन्ट्रल, नई दिल्ली रेल खंड पर महीनों रेल यातायात ठप्प रखा. उस समय सरकार की कमजोरी ऐसी लगी जैसे देश में कोई सरकार ही नहीं है और पूरी अराजकता है. इसके बाद जाटों की मांग मान ली गयी- उससे यह स्थापित हो गया कि जो भी मांग मनवानी है लोगों को उग्र हिंसक आन्दोलन करने चाहिए. लेकिन यूपीए सरकार ने 2014 में चुनाव से एक दिन पहले जाटों को आरक्षित मान लिया जबकि यह आन्दोलन 2012 से चल रहा था. लेकिन 17 मार्च 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने जाटों को दिया आरक्षण रद्द कर दिया कि वे पिछड़ी जाति नहीं हैं.

इसके बाद जाटों ने हरियाणा में बहुत ही गुन्डागिरी का आन्दोलन चलाया. आरक्षण की मांग में रोहतक शहर को लूट लिया और दुकानों को जला डाला. उनका आरक्षण से कोई मतलब ही नहीं था. सरकार को लोगों को करोड़ों का मुआवजा देना पड़ा, लेकिन हरियाणा सरकार ने जाटों के विरुद्ध सख्ती दिखाने के बजाय घुटने टेक दिये और 29 मार्च 2016 को उन्होंने आरक्षण देने का विधेयक विधानसभा में पारित करा दिया. इस निर्णय पर भी हरियाणा हाईकोर्ट ने 21 जुलाई 2016 को रोक लगा दी और जाटों का मसला राजनैतिक तौर पर जाने के बाद अब फिर आंदोलनों ने रोक लगा दी है. हरियाणा सरकार अभी भी जाटों के दबाव में काम कर रही है और उसने व जाटों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है कि वह हरियाणा हाईकोर्ट के अंतरिम स्टे आर्डर को स्टे लगाकर रोक दे और जाटों को आरक्षण मिलने दे. मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

जाटों ने हरियाणा सरकार को फिर धमकी दै है कि 5 जून से इस मुद्दे पर आन्दोलन करेंगे. अब सरकार भी सक्त दिख रही है कि जाटों को सड़कों पर नहीं आने देंगे. जाट कह रहे हैं कि मामला कोर्ट के अन्दर है और वे फैसला बाहर करेंगे. राज्य सरकार ने 8 जिलों में पेरा मिलिट्री फोर्स तैनात कर दी है. इस बार सरकार और जाटों के बीच घमासान हो जाने की आशंका है. जाट पहले से ज्यादा उग्र व हिंसक होंगे और सरकार भी सश पुलिस से उनका पूरा दमन कर देने को तैयार दिख रही है.

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