जाट जाति का सरकारी नौकरियों में आरक्षण पाने के आन्दोलन का वर्तमान आन्दोलन इसका द्वितीय चरण है. इसका पहला चरण तीन वर्ष पूर्व राजस्थान में इन्हीं मांगों व हिंसक रूप में चल चुका है. उस समय भी मुंबई सेन्ट्रल-दिल्ली रेल खंड पर महीनों रेल यातायात बन्द किया गया. पटरियों पर टेंट लगाकर धरने दिये गये. सड़क यातायात ठप्प रहे. नगरों में भारी आगजनी की गयी. अरबों रुपयों का नुकसान हुआ. पूरे देश का रेल यातायात ठप्प व अस्त-व्यस्त हो गया. राज्य व केन्द्र सरकारें हाथ पर हाथ धरे असहाय और नपुंसक बनी बैठी रहीं. उस समय यही सामने आया कि जयपुर में राज्य व दिल्ली में केन्द्र सरकार नाम की कोई चीज नहीं है.

एक समय गोधरा कांड के बाद गुजरात में लम्बे समय तक साम्प्रदायिक दंगे चलते रहे. यह आरोप लगे कि गुजरात राज्य में मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार कुछ कर नहीं पा रही है. श्री मोदी पर यह आरोप भी लगे कि वे दंगे चलने दे रहे हैं. उस समय केन्द्र में एन.डी.ए. सरकार के प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी वाजपेयी ने श्री मोदी से कहा था कि वे ‘राजधर्मÓ निभाये. जिसका अर्थ था सरकार अपना काम करे- इसका अर्थ था कि दंगे रुकना चाहिए.

राजस्थान में जाट आन्दोलन के लगातार चलते रहने के समय केन्द्र में कांग्रेस नेतृत्व की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यू.पी.ए. सरकार थी. उस समय भी यही लगा कि राजस्थान व राज्य व केन्द्र में यू.पी.ए. की सरकार राजधर्म नहीं निभा पा रही है. इसका संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यू.पी.ए. सरकार से कहा था कि वह राजधर्म निभाये और जाट आंदोलन समाप्त करें. सरकारों ने जाटों की मांगें मानकर आंदोलन समाप्त कराया. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस निर्णय को रद्द कर जाट आरक्षण को भी विधि व संविधान सम्मत न मानते हुए रदद्द कर दिया.

अब हरियाणा में भी व्यापक हिंसा का आंदोलन चला. मांगें मानकर उसे भी खत्म कराया जा रहा है लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला अभी कायम है जिसमें जाट आरक्षण को रद्द कर दिया है. भारत की संवैधानिक व्यवस्था में यह उत्कृष्टï कोटि की व्यवस्था थी कि सुप्रीम कोर्ट पर भीड़ तंत्र या हिंसक आंदोलनों का कोई असर नहीं होता. वे उससे ‘इम्यूनÓ है. वे न्याय, संविधान व कानूनों की परिधि में काम करते हैं और किसी भी अन्य संवैधानिक ऐस्टेट- एग्जीक्यूटिव व लेजिस्लेचर को न्याय, संविधान व कानूनों की सीमा नहीं लांघने देते. ऐसा लगता है कि हरियाणा में भी जो जाट आरक्षण दिया गया है उसे सुप्रीम कोर्ट रद्द ही कर देगा.

सरकार ने जाटों के दोनों प्रथम व द्वितीय चरण में हिंसा, अराजकता, अपराध और भीड़तंत्र के सामने घुटने टेक प्रजातंत्र व संविधान की मर्यादा को तोड़ा है. इसका परिणाम यह होने जा रहा है कि देश में हर आंदोलन हर मांग पर भारी हिंसा होगी और देश का रेल व सड़क ठप्प रहेगा और पूरा देश अराजकता की स्थिति में आ जायेगा. सरकारें प्रथम व द्वितीय चरण में ‘राजधर्मÓ निभाने में असमर्थ रहीं. देश में जाट आंदोलन सफल नहीं हुआ बल्कि सरकारें असफल रहीं. जाटों ने दिल्ली में मुनक नहर बंद कर पानी की सप्लाई रोक दी. राष्टï्रीय राजधानी दिल्ली की पानी आपूर्ति बाधित हुई. स्कूल बंद कर दिये गये. अब सरकारी ड्रामेबाजी में यह कहा जा रहा है कि सेना ने मुनक अपने नियंत्रण में ले ली है. जब इसे जाटों ने बंद किया था तब क्यों सेना ने अपने नियंत्रण में नहीं लिया.

अब तो आंदोलन ही घुटने टेक कर खत्म हो चुका है. अब सेना के नियंत्रण के क्या अर्थ होते हैं. रक्षा मंत्री श्री मनोहर पर्रीकर कह रहे हैं कि जाट आंदोलन से पूरी सख्ती से निपटने के लिये सेना को ‘फ्री हैंडÓ दे दिया गया. जब आंदोलन चरम सीमा पर था तब ‘फ्री हैंडÓ क्यों नहीं किया अब जब वह खत्म हो गया अब सेना ‘फ्री हैंडÓ क्या हवा में घुमायेगी. सरकारों की नपुंसकता का असर रेलों व सड़कों पर बढ़ता हुआ फौरन ही दिखाई पडऩे लगा. पश्चिम बंगाल में कभी एक छोटा या देसी राज ‘कूच बिहारÓ था अब उसे पृथक राज्य बनाने की मांग की गयी है और उसके लिए ‘बेमियादी अनिश्चितकालीन रेल रोकोÓ आंदोलन भी शुरू कर दिया गया है.

Related Posts: