supreme courtनयी दिल्ली 28 जुलाई. उच्चतम न्यायालय ने बलात्कार के कारण गर्भवती हुई गुजरात की एक नाबालिग लड़की को बड़ी राहत प्रदान करते हुए आज कहा कि पीडि़ता की जान बचाने के लिए जरूरी होने पर उसका गर्भपात कराया जा सकता है.

शीर्ष अदालत ने गुजरात उच्च न्यायालय के उस फैसले को पलटते हुए यह व्यवस्था दी, जिसमें 14 वर्षीया पीडि़ता को गर्भपात कराने की अनुमति देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया गया था कि वह 23 सप्ताह की गर्भवती है और संबंधित कानून के प्रावधानों के तहत 20 सप्ताह से अधिक समय के बाद गर्भपात नहीं कराया जा सकता. मेडिकल एंड प्रीगनेंसी टर्मिनेशन एक्ट, 1971 के प्रावधानों के तहत गर्भाधान के 20 सप्ताह से अधिक अवधि के बाद गर्भपात कराना गैर-कानूनी करार दिया गया है. दसवीं कक्षा की छात्रा के माता-पिता ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि बलात्कार के कारण गर्भ में ठहरे बच्चे को जन्म देने के लिए किसी नाबालिग को मजबूर नहीं किया जा सकता, खासकर ऐसी स्थिति में जब वह मानसिक और शारीरिक रूप से बच्चे को जन्म देने में सक्षम न हो. पीडि़ता के माता-पिता ने बेटी का गर्भपात कराने की अनुमति मांगी थी.

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