bpl2भोपाल,  किसान संघ के संवाद कार्यक्रम में रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की नीतियां वल्लभ भवन में बैठकर नहीं बन सकती.
जिन्होंने खेत नहीं देखे, वो नीति क्या बनाएंगे। शिवराज ने इशारों-इशारों में अफसरों को हिदायत दे दी कि वे खेतों में जाकर किसानों के दर्द को समझें फिर नीति बनाएं.

शिवराज ने आगे कहा कि मैं पहले किसान हूं, बाद में सीएम. मैं चाहता हंू कि एक बार मेरे खेत में बैठक रख ली जाए. वहीं नीतियां तय करूं.

इस दौरान किसान संघ के मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ प्रभारी सूर्यकांत दीक्षित ने सीएम से कहा कि आपकी सरकार किसानों के लिए अच्छी योजनाएं तो बनाती है, पर ये योजनाएं जमीन पर नहीं आ पातीं. इस पर शिवराज ने कहा कि मंत्रालय में बैठकर नीतियां जब बनती हैं तो वे जमीनी हकीकत से दूर होती हैं.

इसलिए नीतियां किसानों के बीच जाकर ही बनाई जानी चाहिए. शिवराज ने कहा कि किसान फल और फूलों की खेती की ओर रुझान बढ़ाएं. अगले सप्लीमेंट्री बजट में 800 करोड़ रुपए मंजूर कर इस राशि को सीधे किसानों के खाते में पहुंचाया जाएगा। किसानों को 3800 करोड़ रुपए बांटे जा चुके हैं. शिवराज ने कहा कि प्रदेश में दलहन का रकबा बढ़ाया जाएगा. सरकार गौ संवर्धन के लिए काम करेगी.

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