शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव कोई नई बात नहीं है. यह तो होता ही रहता है पर सोमवार को चीन के शेयर बाजारों में जोरदार गिरावट का असर दुनिया भर में देखा गया. भारतीय शेयर बाजार भी इससे अछूते नहीं रहे. लेकिन आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से वस्तुएं व सेवा कर (जीएसटी) विधेयक पारित कराने की दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों ने निवेशकों को उत्साहित किया है. मंगलवार को सेंसेक्स 209.82 अंक बढ़कर 26032.38 पर आ गया.

यही नहीं, निफ्टी में भी 71.70 फीसद की बढ़त मिली. चीन की मुद्रा ‘युआनÓ के अवमूल्यन से विश्व के तमाम शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई. वैश्विक बाजार के इस उथल-पुथल का प्रभाव भारतीय बाजार पर भी पड़ा. नतीजतन मुंबई शेयर बाजार में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट आई. सेंसेक्स 1624.51 अंक गिर गया, जिससे निवेशकों को एक दिन में ही सात लाख करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा. इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी भारी बिकवाली दबाव में 490.95 अंक के नुकसान से 7809 पर आ गया. शंघाई बाजार करीब आठ फीसद नुकसान के साथ बंद हुआ तो यूरोपीय बाजार भी करीब तीन फीसद नीचे पहुंच गए. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी स्वीकार किया कि इस वैश्विक उथल-पुथल के परिणामस्वरूप भारतीय बाजारों में भी दबाव बढ़ा है, लेकिन इसका कारण घरेलू न होने से यह चिंता का विषय नहीं है.

वैश्विक बाजार में स्थिरता आने के साथ ही भारतीय बाजार भी सुधर जाएगा. रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि हम अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं. बहरहाल, देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद सेंसेक्स में 1.13 फीसद का उछाल आया और यह 290.82 अंक बढ़कर 26032.38 पर आ गया. इसके साथ ही निफ्टी भी 0.92 फीसद यानी 71.70 अंक की बढ़त के साथ 7880.70 पर बंद हुआ. हालांकि पीपुल्स बैंक आफ चाइना ने अपनी ब्याज दरें कम करते हुए कर्ज 0.25 फीसद घटाकर 4.6 फीसद कर दिया.

इसके अलावा रिजर्व रेशियो भी आधा फीसद कम कर 18 फीसद कर दिया गया. इसे देखते हुए उम्मीद थी कि भारत में भी ब्याज दरें कुछ कम कर दी जाएंगी. रिजर्व बैंक की तकनीकी सलाहकार समिति के सात एक्सटर्नल सदस्यों में से चार ने रेपो दरों में कटौती का सुझाव दिया था, लेकिन गवर्नर रघुराम ने इसे दरकिनार करते हुए नीतिगत दरों को ही बनाए रखने की घोषणा की.

आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यह सुधार सरकार द्वारा वस्तु एवं सेवा कर विधेयक को पारित कराने के प्रयासों को देखते हुए आया है. उम्मीद की जा रही है कि सरकार संसद का एक विशेष सत्र बुलाकर जीएसटी समेत अन्य कुछ लंबित लेकिन जनोपयोगी विधेयकों को पारित करने का प्रयास करेगी. इसके लिए संसदीय कार्य मंत्री विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से वार्ता कर आम सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं.

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