उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने अाज कहा कि देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून के लागू होने से अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार हुआ है और अब भारत अाखिरकार “एक देश, एक बाजार’ बन गया है।

श्री नायडू ने यहां “वित्त ,बाजार एवं कर प्रणाली में समकालीन विषय एवं चुनौतियां” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करने के मौके पर कहा कि इस कानून के लागू होने से देश में प्रत्यक्ष कर का परिद्वश्य ही बदल गया है आैर केन्द्र सरकार तथा विभिन्न राज्य सरकारों की तरफ से लागू होने वाले कईं प्रकार के करों के स्थान पर अब एक ही कर लागू किया गया है।

उन्होंने कहा कि दूसरे शब्दोें में यह भी कहा जा सकता है कि इससे व्यापार अौर व्यापरियाें के लिए अनुपालन आसान हुुआ है तथा कारोबार करने में काफी आसानी भी हुई है। श्री नायडू ने कहा कि नोट बंदी ,काले धन पर विशेष जांच दल का गठन और बेनामी संपति कानून,1988 कुछ ऐसे मजबूूत कदम हैं, जो आर्थिक गतिविधियों को कर के दायरे में लाने की दिशा में अहम प्रयास है और काले धन के खिलाफ लडाई को अभी आगे ले जाना है।

उन्होंने कहा कि करों के जल्द भुगतान से सार्वजनिक व्यय में सुधार होगा और सरकार को अपनी विकासात्मक गतिविधियों तथा सामाजिक उद्देश्यों को पूरा करने मेे आसानी होगी। इसी वजह से कंपनियां तथा कारोबारी देश की आर्थिक प्रगति एवं वृद्वि में योगदान करते हैं।

अार्थिक वृद्वि और सुधारों से देश में उपभोक्ताओं का एक विशाल बाजार उभरा है जिसकी खपत की प्रवृत्ति विश्व के अन्य देशोें की तरह ही है और भारत के एक से दस करोड़ लोग वैश्विक खपत श्रेणी की सीमा में आ चुके हैं।

देश में 20 से 30 कराेड लोगों की आबादी वाला उभरता मध्यम वर्ग है जिसके पास अपने चौपहिया वाहन तथा इलैक्ट्रानिक गैजेट्स हैं तथा 50 से 60 करोड़ लोगों का समूह गरीबी के दायरे से बाहर निकल कर साइकिल से मोटरसाइकिल और मोबाइल की तरफ बढ़ रहा है।

उन्हाेंने कहा कि दो सौ साल पहले भारत अमीर देश था और विश्व के सकल घरेलू उत्पाद में उसका योगदान 27 प्रतिशत था। विश्व के अन्य देशों के कारोबारी यहां समुद्री मार्गों से आया करते थे और भारत की समृद्वि तथा दौलत को देखकर दंग रह जाते थे। सिंधु घाटी सभ्यता इसका बेहतरीन उदाहरण है कि प्राचीन काल में भारत कितना उन्नत था।

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