• 18 व 12 फीसद टैक्स स्लैब एक करने पर फैसला जल्द!
  • सीईए अरविंद सुब्रमण्यन ने दिए संकेत
  • कपड़ा व्यापारियों को मिली बड़ी राहत
  • 2 से बढ़कर 4 ‘ हुआ एक्सपोर्ट इंसेंटिव
  • रेडीमेड गार्मेंट सेक्टर को मिलेगा 1143 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन

नई दिल्ली,

जीएसटी के टैक्स स्लैब 12 और 18 फीसदी को एक किया जा सकता है. चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यन ने इस बात के संकेत दिए है.

इंस्टीट्यूट ऑफ हायर लर्निंग में लेक्चर के दौरान उन्होंने कहा कि एक जुलाई से लागू हुई नई टैक्स प्रणाली अगले छह से नौ माह में स्टेबल हो जाएगी और दूसरे देशों के लिए मॉडल बनेगी. सुब्रमण्यन ने कहा कि कुछ समय बाद 12 फीसदी और 18 फीसदी के रेट्स को मिलाकर एक नई दर बनाई जा सकती है.

आने वाले समय में हम टैक्स कैटेगरीज में कमी देखेंगे. जीएसटी प्रणाली के तहत फाइलिंग सिस्टम में कुछ तकनीकी दिक्कतों को मानते हुए उन्होंने कहा कि नया सिस्टम थोड़ा जटिल है क्योंकि राज्यों के पास अलग-अलग आईटी सिस्टम हैं और इन मामलों को जीएसटी काउंसिल देख रही है.

जीएसटी को एक तरह से ट्रांसफॉरमेशनल फिस्कल रिफॉर्म है, जिसे आज तक देश में नहीं देखा गया. उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रत्येक राज्य का अपना टैक्स अधिकारी और अपना आईटी सिस्टम है. मैं आपको यह नहीं बता सकता कि सिस्टम कितना जटिल है.

टैक्सपेयर्स को तकनीकी दिक्कतों का सामना करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सबसे अहम बात जीएसटी काउंसिल की ओर से सही कदम उठाना है और इस दिशा में काम किया जा रहा है.

जीएसटी की वजह से नुकसान झेल रहे टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को सरकार ने बड़ी राहत दी गई है. सरकार ने एक्सपोर्ट इंसेंटिव बढ़ा दिया है. रेडीमेड कपड़ों के एक्सपोर्टर्स को पहले 2 फीसदी राशि इंसेंटिव के तौर पर मिलती थी जिसे बढ़ाकर 4 फीसदी कर दिया गया है.

कारोबारी जून 2018 तक इस स्कीम का फायदा उठा सकते हैं. रेडीमेड गार्मेंट सेक्टर को करीब 1143 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि सरकार मुहैया कराएगी. कॉमर्स मिनिस्ट्री ने कहा कि इससे रेडीमेड गारमेंट और मेड-अप्स का निर्यात बढ़ेगा जिससे रोजगार सृजन में मदद मिलेगी.

मिनिस्ट्री ने कहा है कि भारत से एमईआईएस के तहत यह प्रोत्साहन दर बढ़ाई गई है.इस स्कीम के तहत सरकार कई उत्पादों पर शुल्क लाभ देती है. बढ़ी दर एक नवंबर से अगले साल 30 जून तक लागू रहेगी.

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