अगले 12 दिन बाद एक फरवरी को केंद्र सरकार का बजट लोकसभा में प्रस्तुत होगा. मोदी सरकार के 5 साल की अवधि की यह आखरी बजट होगा. अगले वर्ष 2019 में लोकसभा के आम चुनाव होने जा रहे हैं.

इसलिए जाहिर है कि यह बजट आम जनता पर भारी नहीं पड़ेगा. इसी पृष्ठभूमि पर अभी जी.एस.टी. में भी लोगों को बड़ी राहत दी गयी है. और 29 वस्तुओं और 53 सेवाओं पर यह टैक्स घटाया गया है. नई दरें 6 दिन बाद 25 जनवरी से लागू होंगी.

इस 25वीं बैठक में पेट्रोल-डीजल-पेट्रोलियम पदार्थों को भी जी.एस.टी. के अंतर्गत लाने का विचार अगली 26वीं बैठक के लिये फिलहाल यह कहकर टाल दिया गया कि इस पर बात नहीं हो सकी और इस विषय पर अगली 26वीं बैठक में विचार होगा जो 10 दिन बाद 28 जनवरी को होगी.

इसके 4 दिन बाद बजट पेश होगा और पेट्रोल-डीजल पर राहत देना सकार को माकूल होगा. इन दोनों वस्तुओं पर लगभग सभी राज्य इसे जी.एस.टी. के दायरे में नहीं लाना चाहते और उनका इरादा पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स को पृथक रूप से राज्यों के अधिकार क्षेत्र में ही रखना चाहते हैं.

राज्यों के बजट में सबसे ज्यादा आय….. पेट्रोलियम वस्तुओं- पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस आदि और शराब पर आबकारी (एक्साइज) टैक्स से होती है. लेकिन यह भी बिल्कुल साफ है कि जब तक पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस के भाव पूरे राष्ट्र में जी.एस.टी. से एक से नहीं किये जायेंगे तब तक जी.एस.टी. का मूल उद्देश्य- पूरे राष्ट्र में एक से टैक्स और सम्पूर्ण राष्ट्र र का एक सा राष्ट्रीय बाजार का उद्देश्य ही पूरा नहीं होगा.

पुरानी साधारण बसों, बड़े जार में पेयजल, कीटनाशक, ड्रिप सिंचाई उपकरण आदि पर कर घटाया गया है. हीरा और रत्नों पर जी.एस.टी. 3 की जगह घटाकर 0.25 प्रतिशत किया गया वहीं फिल्टर सिगरेट पर टैक्स 12 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत किया गया.

सभी हायर सेकेण्डरी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश या परीक्षा सेवाओं की फीस को जी.एस.टी. मेें छूट दे दी गयी है. हस्तशिल्प की 29 वस्तुओं पर टैक्स शून्य कर दिया है. वेलवेट ने कपड़ों पर भारी छूट देते हुए 12 से 5 प्रतिशत किया गया.

रिटर्न भरने में भी व्यापारियों को काफी कठिनाई आ रही है. इस पर इस बैठक में चर्चा तो हुई पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है. इस पर अगली बैठक में निर्णय करने के संकेत दिये गये हैं. आगामी फैसले में व्यापारी वर्ग जी.एस.टी. भार 3 बी रिटर्न के साथ उनकी बिक्री का इनवायस… भी दे सकेंगे. इससेे जी.एस.टी. भार 1 और 2 भरने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.

जी.एस.टी. से हटकर केंद्र सरकार ने वित्तीय क्षेत्र में जहां हीरा व रत्नों पर जी.एस.टी. घटाया है वहीं गहनों के क्षेत्र में यह कड़ा कदम उठाया है कि यदि कोई ग्राहक 6 लाख से ज्यादा की जूलरी खरीदता है तो उस गहना व्यापारी (ज्वेलर्स) को इसकी सूचना फाइनेंशियल इंटेलीजेंस को देना होगी.

केंद्र सरकार पिछले साल काले धन के विरुद्ध अभियान में 2 लाख 26 हजार फर्जी कम्पनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर चुकी है. इनके अलावा अब एक लाख बीस हजार फर्जी कंपनियों के रजिस्ट्रेशन और रद्द किये जा रहे हैं. इनके 3 लाख से ज्यादा डायरेक्टर अयोग्य (डिस्क्वालीफाई) किये जा
चुके हैं.

Related Posts: