अभी कुछ दिनों पहले केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने जी.एस.टी. में कुछ राहतों की घोषणा की थी कि छोटे व्यापारी एक माह के बजाय तीन माह में रिटर्न भर सकते हैं. जी.एस.टी. का सिद्धान्त है कि पूरे देश में एक से भाव और एक-सी टैक्स दरें हों बहुत ही उच्च मानदण्ड स्थापित करता है लेकिन जी.एस.टी. का क्रियान्वयन जिस तरह से हो रहा है कि यह उद्देश्य कभी भी पाया नहीं जा सकता.

पेट्रोल और डीजल के भावों को जी.एस.टी. की परिधि से बाहर रखा गया है. जिससे माल भाड़ा के रेट भी अलग-अलग हर राज्य में हैं. उस स्थिति में देश में एक बाजार, एक भाव और एक टैक्स का सिद्धान्त केवल कागजी ही रहेगा.

इसमें कम्प्यूटर और चार्टर एकाउंटेंट की भूमिका इतनी ज्यादा और अनिवार्य हो गयी है कि छोटे व्यापार में दुकान व धंधों का स्थापना खर्च बढ़ गया है. बड़े संस्थानों में अभी भी कम्प्यूटर व चार्टर एकाउंटेंट होते हैं.

अब प्रधानमंत्री आगे आये हैं कि छोटे कारोबारियों को भरोसा दिला रहे हैं कि अगले सप्ताह उन्हें जी.एस.टी. में बड़ी छूट मिल सकती है. इन दिनों गुजरात व हिमाचल में विधानसभाओं के आम चुनाव चल रहे हैं. गुजरात में छोटे व्यापारी की वजह से जी.एस.टी. एक ऐसा मुद्दा है जिससे राज्य में भारतीय जनता पार्टी काफी मुश्किल जा रही है.

उन्हें चुनावों में जी.एस.टी. से हो रही परेशानियों का खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है. हिमाचल से सटे राज्य पंजाब में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी जीती हुई गुरदासपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में बहुत करारी हार के साथ गवां दी.

यहां से उसके सांसद फिल्म अभिनेता सांसद श्री विनोद खन्ना जीते थे, उनकी मौत भी यहां सहानुभूति का वोट नहीं बन सकी. इस वातावरण का प्रभाव हिमाचल पर हो सकता है.इस समय श्री मोदी की घोषणा चुनाव की नजर से की गयी लगती है. नोटबंदी से पूंजी अभाव से त्रस्त छोटे व्यापारी जी.एस.टी. क्रियान्वयन के तौर तरीकों से बेहद परेशान हो गये है.

आगामी 9-10 नवंबर को असम की राजधानी गुवाहाटी में जी.एस.टी. केेंद्रीय समिति की बैठक हो रही है. प्रधानमंत्री ने संकेत दिया है कि उसमें ऐसे फैसले संभवत: आए जिससे टैक्स दरों मे कमी की जाए.

इस समय सरकार को जी.एस.टी. के संबंध में एक कार्य की घोषणा जरूर कर देनी चाहिए कि जब तक जी.एस.टी. सुगमता से लागू और स्वीकार्य कर नहीं हो जाए तब तक इसमें उल्लेखित दंडात्मक प्रावधान लागू नहीं होंगे. उन्हें प्रावधानों को निलंबित माना जाए.

एक जुलाई से जी.एस.टी. लागू हुआ है और पहले दिन से देश के छोटे व्यापारी बहुत ज्यादा परेशानी में आ गये हैं. इस वर्ग का धंधा ही चौपट होता जा रहा है. जी.एस.टी. की खानापूरी धंधे से ज्यादा जरूरी हो गयी है.

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