अंतराष्ट्रीय शासकीय मान्यता की संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय संस्था विश्व बैंक ने भारत की जी.एस.टी. प्रणाली को पूरे संसार में सबसे जटिलता की कर प्रणाली कहा है. आमतौर पर अन्तरराष्ट्रीय रेटिंग संस्थाएं प्रतिष्ठिïत और ख्याति प्राप्त होने के बाद भी निजी संस्थाएं होती हैं, वे विश्व बैंक का स्तर नहीं रखती हैं.

उनकी विश्व बैंक जैसे संस्थाओं से तुलना भी नहीं की जा सकती. लेकिन जब निजी स्वामित्व की रेटिंग संस्थाओं ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की प्रशंसा की तो सरकार उसे अंतराष्ट्रीय सर्टीफिकेट मानकर उत्साहित होकर प्रदर्शित व वर्णित करती है.

लेकिन अब जब विश्व बैंक जैसी संस्था ने भारत के जी.एस.टी. को संसार में सबसे ज्यादा जटिल करार दे दिया है तब मोदी सरकार को न सिर्फ इसे स्वीकार कर फौरन जी.एस.टी. में व्यापक परिवर्तन कर अब संसार में सबसे सुगम व सरल बना देना चाहिए.

यह भी एक आम प्रवृत्ति व मानसिकता है कि अपनी कोई आलोचना व विवेचना करते हैं तो सरकार उसे नजरअंदाज भी करती है और सही नहीं मानती. आज जो विश्व बैंक ने कहा वह पहले दिन से भारत का उद्योग-व्यापार यही कह रहा है कि इससे धंधा ही चौपट हो जायेगा.

हर महीने ऑनलाइन रिटर्न भरने की प्रक्रिया बिल्कुल नहीं चल पायी. उसकी जटिलता में हर व्यापारी-उद्योग डिफाल्टर हो गया. उस पर अकारण रिटर्न न भरने की पेनाल्टी लगने लगी और सरकार को सबसे पहले अपनी गलती मानते हुए इसे वापस लेना पड़ा था.

विश्व बैंक ने अब मोदी सरकार पर महत्वाकांक्षी कर सुधार प्रणाली (टैक्स रिफार्म सिस्टम) पर गंभीर सवाल उठाते हुए भारत में लागू सबसे ज्यादा जटिल कहा है विश्व बैंक ने कहा है कि 115 देशों में भारत का टैक्स रेट सबसे ऊंचा है.

दुनिया के 49 देशों में उनकी जी.एस.टी. के अंतरगत पूरे देश में सभी वस्तुओं पर केवल एक स्लेब (टैक्स दर) है और 28 देशों में दो स्लेब हैं. भारत सरकार ने पांच स्लेब बनाए हैं. इसमें इटली, लग्जमबर्ग, पाकिस्तान और घाना जैसे देश भी शामिल हैं और इनकी आर्थिक स्थिति डांवाडोल है. भारत में पांच स्लेब 0-5-12-18 और 28 हैं.

भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार को लगातार संसदीय अवरोधों के कारण जी.एस.टी.लागू करने नहीं दिया. लेकिन जब सत्ता में आए तो जी.एस.टी. लागू करने के लिए उतने ही लालायित रहे और विपक्ष में आ गयी कांग्रेस ने उसे इसमें सहयोग देकर इसे लागू हो जाने दिया. लेकिन इसे इस बेतुके ढंग से लागू किया गया कि इसका मूल आधार देश में एक राष्ट्रीय बाजार, एक-सा टैक्स और सभी वस्तुओं के एक मूल्य रहेंगे ही, खत्म कर दिया.

हर वस्तु के मूल्य में आधा और कहीं आधे से ज्यादा भाग ढुलाई (ट्रांसपोर्ट) का होता है. जी.एस.टी. से पेट्रोल-डीजल को बाहर रख दिया. इसकी वजह से पूरे देश में ढुलाई के रेट अलग होने से वस्तुओं के दाम भी अलग-अलग रहेंगे और जी.एस.टी. का अर्थ ही अनर्थ हो गया. मोदी सरकार ने नोटबंदी और जी.एस.टी. से अर्थव्यवस्था, उद्योग-व्यापार को भारी नुकसान पहुंचाया है. हो सकता है यही उपचुनावों में परिलक्षित हो रहा हो और 2019 में प्रहार हो जाए.